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कम उम्र में महिलाओं का मां बनना साबित हो रहा है खतरा

मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में पिछले 72 घंटे के अंदर 11 बच्चों की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। शिशु मृत्यु दर के कारणों की जांच करने वाले स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि कम उम्र में मां बनना सबसे महत्वपूर्ण कारण है। दूसरा बच्चों का कम वजन है। मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज और जंगीपुर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक के बाद एक बच्चे की मौत के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है।

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कम उम्र में महिलाओं का मां बनना साबित हो रहा है खतरा

कम उम्र में महिलाओं का मां बनना साबित हो रहा है खतरा

राज्य स्वास्थ्य विभाग की समिति की जांच में खुलासा
मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में 72 घंटे में 11 बच्चों की मौत का मामला
मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में पिछले 72 घंटे के अंदर 11 बच्चों की मौत से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। शिशु मृत्यु दर के कारणों की जांच करने वाले स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि कम उम्र में मां बनना सबसे महत्वपूर्ण कारण है। दूसरा बच्चों का कम वजन है। मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज और जंगीपुर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक के बाद एक बच्चे की मौत के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है। स्थिति को देखने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने एक जांच समिति का गठन किया। स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और नर्सों से पूछताछ कर बच्चे की मौत के कारणों को जानने की कोशिश की। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई, बल्कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद बीमार बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
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कुपोषण से पीडि़त थे मृत बच्चे
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, सभी मृत बच्चे कुपोषण से पीडि़त थे। नवजात शिशुओं का औसत वजन 600 ग्राम से भी कम था। उनकी मां 16 से 17 साल की हैं। मां के गर्भ में भ्रूण के पूर्ण विकास से पहले ही समयपूर्व प्रसव के परिणामस्वरूप बच्चे विभिन्न शारीरिक जटिलताओं से पीडि़त होने लगे थे। अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी।
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460 और 510 ग्राम वजन के थे बच्चे
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुर्शिदाबाद के हरिहरपाड़ा की 16 वर्षीय लडक़ी ने 460 ग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया। जंगीपुर की 17 साल 3 माह की लडक़ी ने 510 ग्राम वजन के बच्चे को जन्म दिया। सिर्फ ये दो मां ही नहीं, 72 घंटे में जिन 11 नवजात शिशुओं की मौत हुई, उन सभी की मां या तो नाबालिग थीं या मुश्किल से अठारह साल की थीं। दरअसल, मुर्शिदाबाद के गांवों में किशोरावस्था से पहले ही लड़कियों की शादी कर देने का चलन आज भी कायम है। बाल विवाह रोकने के लिए केंद्र और राज्यों के पास कई योजनाएं हैं। लेकिन अगर आप मुर्शिदाबाद के गांव में जाएंगे तो आपको बाल विवाह की तस्वीरें दिखेंगी और परिणामस्वरूप, बच्चे कुपोषण की समस्या के साथ पैदा होते हैं। वे जन्म से ही विभिन्न रोगों से पीडि़त होते हैं।
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आशा कार्यकर्ताओं को अधिक जिम्मेदार बनाने की जरूरत
राज्य परिवार नियोजन अधिकारी डॉक्टर असीम दास मालाकार ने कहा कि एक बच्चा था जिसका वजन 400 ग्राम था। वह पांच महीने तक अपनी मां के गर्भ में था। इसमें कोई चिकित्सीय त्रुटि नहीं थी, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल अमित दान ने एक और जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 16 से 17 साल की लड़कियां मां बन रही हैं। परिणामस्वरूप, बच्चे कम वजन के साथ-साथ जन्म दोषों के साथ पैदा होते हैं। डॉक्टर ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को भी अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। प्रशासन को भी अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

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