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Lightning Cattle Death: आकाशीय बिजली से 5 मवेशियों की मौत, तेज अंधड़ से उड़ी छतें, बेघर हुए कई परिवार

Lightning Cattle Death: आकाशीय बिजली, तेज अंधड़ और ओलावृष्टि से 5 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि कई घर और सरकारी भवन क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग की है।

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कुदरत का कहर: 5 मवेशियों की मौत (photo source- Patrika)

कुदरत का कहर: 5 मवेशियों की मौत (photo source- Patrika)

Lightning Cattle Death: शनिवार दोपहर बाद फरसगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत कोनगुड़ में तेज अंधड़, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में 5 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि सरकारी भवनों सहित ग्रामीणों के कई घर क्षतिग्रस्त हो गए।

Lightning Cattle Death: आकाशीय बिजली की चपेट में हुआ बड़ा नुकसान

तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कोनगुड़ स्थित बालक छात्रावास की छत उड़ गई और स्कूल के सांस्कृतिक भवन का शेड भी क्षतिग्रस्त हो गया। गांव के करीब 15 से 20 घरों की छतें पूरी तरह उड़ गईं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से घसियाराम उसेंडी (1 बैल, 1 गाय), नागेश मरकाम (1 बैल, 1 गाय) और धन सिंह गोटा (1 बैल) को नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राजस्व और कृषि विभाग की टीम भेजकर नुकसान का आकलन करने तथा प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के तहत शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।

’’यह हमारे गांव के लिए एक बड़ी आपदा है। सरकारी भवनों से लेकर गरीबों के सिर से छत छिन गई है। हमने प्रशासन को इसकी सूचना दी है और मांग करते हैं कि तत्काल राहत कार्य शुरू किया जाए।’’ सियाबती मरकाम, सरपंच

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

मवेशियों की मौत के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी भारी तबाही हुई है। सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार, पंचायत के कई मक्का और धान उत्पादक किसानों को इस बेमौसम मार से भारी नुकसान पहुँचा है। कइयों की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे अन्नदाता आर्थिक रूप से टूट गया है।

Lightning Cattle Death: स्तर में मौसम का बदलता मिजाज

छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर संभाग में बीते कुछ वर्षों से मौसम के पैटर्न में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। गर्मी के मौसम में अचानक तेज आंधी, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली की घटनाएं बढ़ी हैं। यह बदलाव कृषि और ग्रामीण जीवन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

आकाशीय बिजली और ग्रामीण जोखिम

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले खेत, कच्चे मकान और पशुधन पर निर्भरता अधिक होने के कारण आकाशीय बिजली का खतरा ज्यादा होता है। हर साल राज्य में कई लोग और मवेशी इसकी चपेट में आते हैं। कोनगुड़ की घटना भी इसी खतरे की एक कड़ी है, जहां एक ही दिन में कई पशुओं की जान चली गई।