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आधुनिक युग में अभी भी ग्रामीण करते है मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल, जानिए इसके १० बड़े फायदे

समय के साथ साथ जिस तरह आधुनिकता का प्रभाव का हमारे जीवन पर बढ़ा है, मिट्टी के बने घडा के पानी पीने से तन मन हो जाता है तरोताजा

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आधुनिक युग में अभी भी ग्रामीण करते है मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल, जानिए इसके १० बड़े फायदे

केशकाल. समय के साथ साथ जिस तरह आधुनिकता का प्रभाव का हमारे जीवन पर बढ़ा है हमारे रहन.सहन और खाने.पीने के तौर तरीके पहले से काफी बदल गए है। हमारे रसोईघरों में भी इसी तरह कई बदलाव हुए है जैसे जहाँ पहले लोग चूल्हे और मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करा करते थे अब उनकी जगह गैस चूल्हों फ्रिज और ओवन मेकर ने ले लिया है ।

एक समय था जब घरों में लोग भोजन पकाने और परोसने के लिए मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किया करते थे। लेकिन आगे चलकर वह परंपरा बस दही की हांडी और मटकों तक सीमित रह गईए लेकिन अब यह ट्रेंड फिर से दिखाई दे रहा है। लोगों का रुझान मिट्टी के बने बर्तनों की ओर बढ़ रहा है। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी फायदेमंद होता है।

मिट्टी में कई गुण पाए जाते हैं
अधिकांश धातुएं मिट्टी में ही पाई जाती हैं। जब हम मिट्टी के बर्तन में खाना खाते हैं तो अनेक पोषक तत्व जैसे जिंक, मैग्नीशियम, आयरन हमारे शरीर में आते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रो में आज भी मिट्टी के बर्तन से बनाते हैं खाना
बस्तर क्षेत्र के अधिकतर गाँवो में आज भी मिट्टी के बर्तन से ही खाना सब्जी बनाते हैं । जो बहुत ही स्वादिष्ट होता है मिट्टी के बर्तन में पानी रखने से ठंडा पानी मिलता है । आज भी जगहण्जगह गांव में मिट्टी के बर्तन में पानी रखा जाता है । वहीं अगर पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं तो इसमें खाना पकाने से 7: पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और कांसे के बर्तन में बने खाने में से 3: पोषक ही नष्ट हो जाते हैं लेकिन अगर आप मिट्टी के बर्तन में खाना बनाते हैं तो 100: पोषक तत्व होते हैं ।


सुंदरता में भी बेजोड़ है मिट्टी का बर्तन
ये मिट्टी के बर्तन सुन्दरता के मामले में भी बेहद आकर्षक लगते है बस इन्हें थोडा संभाल के रखना पड़ता है। उदाहरण के लिए अगर आप चाय आम कप की बजाएं कुल्हड़ में पियेंगे तो ये देखने में जितना अच्छा लगता है उतना ही इसका स्वाद भी बढ़ जाता है।


दो प्रकार के बनते है मिट्टी के बर्तन
इस समय मिट्टी के बर्तन दो तरह से बन रहे हैं। पहला तो परंपरागत चाक पर जैसा कुम्हार बनाते हैं। दूसरा मिट्टी के बर्तन अब फैक्ट्री में डाई से यानी खांचे द्वारा भी बनाए जा रहे हैं। दोनों तरह के मिट्टी के बर्तन मजबूत होते हैं लेकिन जो हाथ से बने होते हैंए वे ज्यादा मजबूत होते हैं क्योंकि उन्हें ज्यादा अच्छे तरीके से भट्टी में पकाया जाता है। कुम्हार एकण्एक बर्तन पर खास ध्यान देते हैं।

गांव में आज भी चाक से ही बर्तन बना कर हॉट बाजारों में बेचते हैं कुम्हार
क्षेत्र में अधिकतर कुम्हार जाति के लोग ही मिट्टी का बर्तन बनाते हैं जो आज भी पुराने परम्परा से चाक के सहारे हाथ से बनते हैं और उसे हाट बाजारों में बेचते हैं । गर्मी के दिनों में सबसे ज्यादा हांडी का विक्रय बहुत होता है जिससे लोग गर्मी से बचने ठंडा पानी पीते हैं ।

मिट्टी का बर्तन सफाई है आसान
अकसर लोगों को मिट्टी के बर्तन कैसे धोने हैं इस बात को लेकर भी भ्रम रहता है। कई लोग जानकारी के अभाव में इन्हें खरीदते ही नहीं हैं। मिट्टी के बर्तनों को धोना बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको कोई केमिकल युक्त साबुनए पाउडर या लिक्विड का इस्तेमाल नहीं करना। आप बर्तनों को केवल गरम पानी से धो सकते हैं। चिकनाई वाले बर्तनों में ज्यादा से ज्यादा आप पानी में नीबू निचोड़ कर डाल दें तो बर्तन बिल्कुल साफ हो जाते हैं। अगर रगडक़र साफ करना चाहते हैं तो नारियल की बाहरी छाल यानी नारियल के जूट से बर्तन साफ कर लें।

सुविधाजनक इस्तेमाल
कुछ लोगों को लगता है कि पहले तो चूल्हा इस्तेमाल होता था इसलिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता था। लेकिन गैस पर क्या मिट्टी के बर्तनों को चढ़ाया जा सकता है इसका जवाब है हां। आप गैस पर मिट्टी के बर्तनों में खाना बना सकते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि जिस बर्तन में आप खाना पका रहे हैं वह अच्छा होना चाहिए। बस इस बात का ख्याल रखें कि जब आप मिट्टी के बर्तन को गैस पर चढ़ाते हैं तो उसकी फ्लेम यानी आंच मध्यम रखें। तेज आंच पर खाना न बनाएं। वैसे भी कोई भी बर्तन हो तेज आंच पर खाना नहीं पकाना चाहिए क्योंकि इससे भोजन की पौष्टिकता नष्ट हो जाती है। हालांकि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने में सामान्य बर्तनों की अपेक्षा थोड़ा सा ज्यादा समय लगता है। लेकिन सेहत के लिए सबसे बढिय़ा मिट्टी के बर्तन ही होते हैं।

मिट्टी के नया बर्तन इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों का रखना पड़ता है ध्यान
मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करने से पहले ध्यान रखें कि जो बर्तन कुकिंग में इस्तेमाल होने हैं, उन्हें पहली बार यूज करने से पहले लगभग 12 घंटे पानी में भिगोकर रखें। यानी रात भर इन बर्तनों को पानी में रखें और सुबह सुखाने के लिए रख दें। जब सूख जाएं तब इस्तेमाल करें। बड़े बर्तनों
को बस पहली बार ही 12 घंटों के लिए भिगोना है और छोटे बर्तनों को जैसे गिलासए कटोरीए दही जमाने की हांडी चम्मचए कप आदि को 6 घंटे भिगोना काफी है। उसके बाद मध्यम आंच पर रखें और इसमें पके पौष्टिक भोजन का आनंद लें।

ये है प्रमुख फायदेमंद मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करने से
अपच और गैस की समस्या दूर होती है। पौष्टकता के साथ भोजन का बढ़ता है स्वाद। कब्ज की समस्या से मिलती है निजात । भोजन में मौजूद पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं। भोजन का पीएच वैल्यू मेंटेन रहता हैए इससे कई बीमारियों से बचाव होता है।