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पेश की मिसाल: आश्रम छात्रावास में नहीं था बच्चों के लिए सभागार, पालकों ने श्रमदान कर बना डाला शेड

arents made a shed: जब आश्रम छात्रावास में बच्चों के एक साथ बैठने व भोजन करने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होने की जानकारी बालकों को मिली तो उन्होंने देर किए बिना ही आश्रम छात्रावास पहुंच कर श्रमदान करते हुए एक शेड का निर्माण किया।

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 पालकों ने श्रमदान कर बना डाला शेड

पालकों ने श्रमदान कर बना डाला शेड

Parents made a shed: जब आश्रम छात्रावास में बच्चों के एक साथ बैठने व भोजन करने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होने की जानकारी बालकों को मिली तो उन्होंने देर किए बिना ही आश्रम छात्रावास पहुंच कर श्रमदान करते हुए एक शेड का निर्माण किया। हम बात कर रहे हैं बालक आश्रम शाला करियाकाटा, संकुल केंद्र मयूर डोंगर की, जहाँ पालक व स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ने सामुदायिक सहभागिता का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बच्चो के मध्यान भोजन करने व सभा के लिए एक शेड निर्माण की व्यवस्था कर श्रमदान करते हुए पूरा कर लिया।

आसपास के 27 गांव के बच्चे हैं अध्ययनरत
ज्ञात हो कि, आश्रम शाला में लगभग 27 गांव के बच्चे अध्यनरत हैं। अधिकतर पालक सुदूर अंचल के होने के बावजूद भी सजगता व तत्परता के साथ वे शनिवार की दोपहर बच्चो से मिलने के बहाने पहुचे और शाम होते-होते अपना बहुमूल्य समय देकर आश्रम परिसर में शेड निर्माण कार्य पूर्ण किया।

ज्ञात हो कि पूर्व में स्कूल प्रबंधन समिति ने मीटिंग के दौरान पालकों व सदस्यों को सूचित किया गया था कि, शाला में मध्यान भोजन करने व सभा करने के लिए कोई अतिरिक्त जगह या हाल नही है। पूर्व में पंचायत के सहायता से एक शेड निर्माण करवाया गया था जो कि, लगभग उजड़ गया है। इसे देखकर SMC सदस्यों के त्वरित निर्णय लिया की इसका पुनः निर्माण किया जायेगा। शेड निर्माण में लगभग 20 समिति सदस्य व पालक उपस्थित हुए।

हॉफ डे होने के बावजूद भी की ड्यूटी
शनिवार को हॉफ डे होने के बावजूद भी आश्रम शाला के शिक्षक हितेंद्र कुमार श्रीवास और नितेंद्र सेठिया शाला में शाम तक उपस्थित रहकर पालकों एवम समिति सदस्यों का हौसला अफजाई करते हुए आवश्यक निर्देश दिया। इस बीच आश्रम के कर्मचारी गणपत सेठिया एवम सोमेश्वर ठाकुर का सहयोग भी सराहनीय रहा।