
स्कूल की हालत एेसी की कभी भी ढह जाए छत, फिर भी जान हथेली पर लेकर पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स
कोण्डागांव/बड़ेकनेरा . एक तरफ तो शासन-प्रशासन स्कूलों को बेहतर से बेहतर बनाने में जुटा हुआ हैं। वहीं जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा का हाईस्कूल भवन जहां कक्षा 9 वीं से 12 तक की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। जहां तकरीबन 250 से ज्यादा छात्र-छात्राएं रोजाना दूर-दराज से पढ़ाई करने पहुंचते हैं। यह स्कूल भवन जर्जर हो चुका हैं।
यहां बारिश में पानी तो गर्मी के दिनों में सीमेंट व गिट्टी छत से टपकते रहते हैं। इसकी जानकारी हालांकि स्कूल प्रबंधन ने उच्चधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी दी। बावजूद इसके इस ओर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। इससे यहां रोजाना पढऩे आने वाले बच्चों को डर बना रहता हैं कि न जाने कब छत उनके उपर गिर जाए। कहने को तो शाला प्रबंधन समिति का गठन तो किया गया है, लेकिन यह भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। इसके चलते मजबूरी में इस स्कूल में अपना पंजीयन करवाने वाले स्कूली बच्चें अपनी जान जोखिम में डालकर कक्षाओं में बैठने मजबूर हैं।
स्कूल परिसर में ही बने एक सांस्कृतिक मंच पर जैसे-तैसे एक कक्षा का संचालन स्कूल प्रबंधन अपने से तो कर रहा हैं, लेकिन यहां लगने वाली अन्य कक्षाएं जस की तस ही चल रही हैं। ज्ञात हो कि इस स्कूल भवन की स्थिति को देखते हुए यहां नए स्कूल भवन का निर्माण तो शुरू करवाया गया, लेकिन यह भी सालभर से अधिक का समय निकल गया और अब तक केवल नींव की खुदाई ही हो पाई हैं।
समय रहते यदि इस भवन का निर्माण या कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाया तो जर्जर भवन में पढऩे वाले बच्चों के साथ कुछ अनहोनी घटना होने से इंनकार नहीं किया जा सकता।ज्ञात हो कि इस स्कूल भवन की स्थिति को देखते हुए यहां नए स्कूल भवन का निर्माण तो शुरू करवाया गया, लेकिन यह भी सालभर से अधिक का समय निकल गया और अब तक केवल नींव की खुदाई ही हो पाई हैं।
Published on:
26 Jul 2018 06:35 pm
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