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आपदाओं को झेला, पीढिय़ों को सिखाया क, ख, ग… 100 साल का हुआ मिशन प्रायमरी स्कूल

-आजादी से पहले क्रिश्चियन सोसायटी ने 1916 में रखी थी स्कूल की नींव

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कोरबा

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Shiv Singh

Jan 18, 2019

आपदाओं को झेला, पीढिय़ों को सिखाया क, ख, ग... 100 साल का हुआ मिशन प्रायमरी स्कूल

आपदाओं को झेला, पीढिय़ों को सिखाया क, ख, ग... 100 साल का हुआ मिशन प्रायमरी स्कूल

कोरबा. शहर के बड़े उद्योगपति हों नेता या अफसर। दूर-दूर तक पीढिय़ों को प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्रदान करने की बात निकले तो शहर के मिशन रोड में स्थापित मिशन प्रायमरी स्कूल का जिक्र जरूर होता है। क्रिश्चियन सोसायटी द्वारा संचालित इस स्कूल की नींव १९१६ में रखी गई थी। जबकि वर्तमान बिल्डिंग में इसे १९१९ में शिफ्ट किया गया था। स्कूल ने इस वर्ष पूरे एक शताब्दी का सफर पूरा कर लिया है।

अंग्रेजो द्वारा रानी धनराजकुंवर को लिखा एक पत्र पुरातत्विक संग्रहालय में मौजूद है। जिसमें अंग्रेजों ने उल्लेख किया है, आप शासन को बेहतर तरीके से चला रही हैं। आपने प्राथमिक स्कूलों की स्थापना कर क्षेत्र की उन्नति को नया आयाम दिया है। रानी धनराज कुंवर का प्रभुत्व मिशन रोड व रानी रोड पुरानी बस्ती के आस-पास के क्षेत्रों के में देखने को मिलता है। संभवत: इतिहास में भी इसी स्कूल का जिक्र मिलता है।

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जहां हासिल की प्राथमिक शिक्षा अब वहीं की प्रधान पाठक
मिशन प्राथमिक स्कूल में वर्तमान दर्ज संख्या २७५ है। यहां पदस्थ प्रधान पाठक हार्मोनिका गाडिया ने बताया कि प्राथमिक स्तर की शिक्षा मिशन प्रायमरी स्कूल से ही प्राप्त की है। मेरे लिए यह गर्व की बात है अब इसी स्कूल में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत हूं। शहर में कहीं भी चले जाओ जब लोगो का पता चलता है कि मैं मिशन स्कूल से हूं। तब वह अपने परिवार के किसी ने किसी सदस्य का जिक्र कर ऐसा जरूर कहते हैं कि उन्होंने भी प्राथमिक शिक्षा मिशन प्रायमरी स्कूल से प्राप्त की है। अब तो ढेर सारे स्कूल खुल गए हैं। लेकिन पहले ऐसा नहीं था। दूर-दूर से लोग मिशन प्रायमरी स्कूल में पढऩे आते थे। अनुदान प्राप्त स्कूल होने के कारण स्कूल की फीस ६० रूपए प्रतिमाह तय की गई है।

गुरुघासी दास जयंती पर मनाया जाता है क्रिसमस डे
मिशन प्रायमरी स्कूल लगातार १०० वर्षों से किताबी ज्ञान के साथ ही सामाजिक समरसता का संदेश भी लोगों को दे रहा है। क्रिश्चियन सोसायटी द्वारा संचालित स्कूल में क्रिसमस की छुट्टी २५ दिसंबर को दी जाती है। जिसके कारण सतनामी समाज के संत शिरोमणी बाबा गुरु घासी दास की जयंती१८ दिसंबर को यहां क्रिसमस डे मनाने की परंपरा है। जो कि आज भी जारी है। इस दिन बच्चों को गिफ्ट दिया जाता है।

1975 में आई थी बाढ़, डूब गया था पूरा स्कूल
स्कूल संचालन करने वाले सोसायटी की मानें तो सन १९७५ के आस-पास जिले में भयंकर प्राकृतिक आपदा आई थी। बाढ़ में पूरा का पूरा स्कूल डूब गया था। तब दाखिल खारीज जैसे कई पुराने दस्तावेज भी नष्ट हो गए थे। स्कूल की वर्तमान बिल्डिंग भी उस बाढ़ की याद दिलाती है। स्कूल की इमारत को तब से अब तक कोई खास क्षति नहीं पहुंची है। खट्टी-मीठी यादों के साथ प्रायमरी मिशन स्कूल का सफर अब भी जारी है।