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12 करोड़ रुपए से कालोनियों का होगा कायाकल्प, कार्य हुआ शुरू

पूरे देश में इस समय मिशन क्लीन सिटी पर जोर दिया जा रहा है। इस कार्य में एसईसीएल भी अपनी सहभागिता निभा रही है। 50 साल पुरानी कालोनियों की सुध लेते हुए कार्य कराया जा रहा है। मकानों की मरम्मत की जा रही है। नाली का निर्माण किया जा रहा है। अब मकान के पीछे के रिक्त हिस्से को पत्थर से ढंकने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ताकि कचरे का ढेर समाप्त हो जाए।

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Piyushkant Chaturvedi

Jan 12, 2017

12 crore would rejuvenation colonies, start of wor

12 crore would rejuvenation colonies, start of works

कोरबा.
पूरे देश में इस समय मिशन क्लीन सिटी पर जोर दिया जा रहा है। इस कार्य में एसईसीएल भी अपनी सहभागिता निभा रही है। 50 साल पुरानी कालोनियों की सुध लेते हुए कार्य कराया जा रहा है। मकानों की मरम्मत की जा रही है। नाली का निर्माण किया जा रहा है। अब मकान के पीछे के रिक्त हिस्से को पत्थर से ढंकने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ताकि कचरे का ढेर समाप्त हो जाए।


योजना इस प्रकार बनाई गई है कि एक-एक करके सभी कार्य को कराया जा रहा है। छत की मरम्मत भी इसमें शामिल है। इसके लिए अलग अलग कालोनी के लिए ठेका जारी किया गया है। पहले यह कहकर कार्य को टाला जा रहा था कि कोरबा क्षेत्र में फंड की कमी है। बड़े कार्यों को नहीं कराया जा सकता। इस चक्कर में मकानों की हालत दिनों दिन बिगड़ रही थी। देखरेख नहीं होने से मकानों पर अवैध कब्जा बढ़ रहा था। अब मकानों को नए सिरे से चमकाने के लिए कार्यों को स्वीकृति दी गई है।


कर्मचारियों का कहना है कि कोरबा क्षेत्र की कालोनियां खदान खोलते समय बनाई गई थी। कोरबा कोलयरी के कार्यकाल में पंप हाऊस व पंद्रह ब्लाक कालोनी के बाद एक एक करके जेपी नगर, सुभाष ब्लाक, एसबीएस कालोनी का निर्माण किया गया। कोरबा पश्चिम क्षेत्र में कालोनियों की स्थापना की गई। शुरू में कालोनी की देखरेख समय पर की गई। समय बीतने के साथ यह कार्य नहीं हो पाया। इससे उपलब्ध कराई गई सुविधाएं दम तोडऩे लगी। अब समस्याओं की सुध लेते हुए इनका निराकरण किया जा रहा है।

पीछे में अधिक गंदगी-
आमतौर पर यह देखा गया है कि लोग मकान के सामने के हिस्से की देखभाल अधिक करते हैं। साफ सफाई में अधिक ध्यान दिया जाता है। आजू बाजू की सफाई यदा कदा कर ली जाती है। मकान के पीछे के हिस्से को यूं ही छोड़ दिया जाता है। इससे गंदगी बढ़ती जाती है। ऐसा ही हाल कालोनियों का है। इससे निपटने के लिए मकान के पीछे रिक्त हिस्से को पत्थर से ढंकने का निर्णय लिया गया है। यह कार्य शुरू किया जा रहा है।

बाथरूम व किचेन में टाइल्स-
कंपनी द्वारा अन्य कार्यों के साथ ही बाथरूम व कीचन में टाइल्स लगाने का निर्णय लिया गया है। अभी कई मकानों मेंं दोनों स्थान की हालत बिगड़ गई है। नए सिरे से काम होने का लाभ कर्मचारी परिवार को मिलेगा।

क्रांकीट की बन रही नालियां-
पहले नाली का निर्माण ईंट से किया गया था। पुरानी नाली होने से टूट फूट रही थी। इसे नए सिरे से क्रांकीट की बनाई जा रही है। पुरानी नाली में जाम की समस्या सामने आ रही थी। अधिक बारिश होने पर पानी मकानों में प्रवेश कर जाता था। इससे कर्मचारी परिवार को परेशानी हो रही थी। नई नाली बनने के बाद समस्या से राहत मिल जाएगी। गंदगी भी कम होगी।

की जाएगी छत की ढलाई-
कई मकानों की छत से से बारिश का पानी टपकने की शिकायत आ रही थी। इसे देखते हुए छत में डेढ़ इंच मोटी ढलाई करने का निर्णय लिया गया है। इसके ऊपर में डामर की परत बिछाई जाएगी। इससे मकानों में सीपेज की समस्या कम हो जाएगी। सेंट्रल वर्कशॉप द्वारा तो मकानों के गेट पर जालीदार दरवाजे लगाए जा रहे हैं।

12 करोड़ रुपए का आवंटन-
कालोनियों में कार्यों के लिए एसईसीएल मुख्यालय द्वारा राशि का आवंटन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी कल्याणकारी कार्यों पर कंपनी बड़ी राशि खर्च कर रही है। अलग अलग कालोनियों के लिए 12 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। कार्यों का प्रस्ताव क्षेत्रीय मुख्यालय से भेजा जाता है।