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कोरबा पश्चिम में 1320 मेगावाट का नया थर्मल पावर प्लांट

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार कोरबा में प्रदेश सरकार 1320 मेगावाट की दो इकाइयां लगाने जा रही है। दोनों इकाइयां कोयले पर आधारित होगी। वर्ष 2030- 31 तक दोनों इकाइयों के उत्पादन में आने की संभावना है।

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८ साल पुरानी यूनिट ने अपने पुराने रेकार्ड १११ दिन नौ घंटे ५३ मिनट को तोड़ा

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छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन कंपनी की दोनों इकाइयां कोरबा पश्चिम संयंत्र परिसर में लगाई जाएगी। प्रत्येक इकाई की उत्पादन क्षमता 660- 660 मेगावाट होगी। गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज की समीक्षा बैठक हुई। इसमें बिजली की वर्तमान उपलब्धता और जरुरत के अलावा भविष्य में होने वाली मांग पर चर्चा की गई।

इसमें मुख्यमंत्री की ओर से कोरबा में 1320 मेगावाट की दो इकाइयां लगाने की घोषणा की गई। यह इकाई छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन कंपनी की प्रदेश की सबसे बड़ी इकाई होगी। इसका निर्माण कोरबा पश्चिम स्थित संयंत्र परिसर में किया जाएगा। वर्तमान में कोरबा पश्चिम संयंत्र में नया बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए पर्याप्त जमीन है। नए संयंत्र के लिए कंपनी को जमीन अधिग्रहण की जरुरत नहीं पड़ेगी।


840 मेगावाट की इकाइयां होगी बंद
गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कोरबा पश्चिम संयंत्र परिसर में स्थित 210-210 मेगवाट की चार इकाइयों को बंद करने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल की आदेश पर इन इकाइयों को 2020- 21 तक बंद किया जाना था। लेकिन बिजली की वर्तमान जरुरत होने को देखते हुए प्रदेश सरकार 210-210 मेगावाट की चार इकाइयों को बंद करने के पक्ष में नहीं है। लेकिन सरकार पर पुराने संयंत्र को बंद करने का दबाव है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने कोरबा पश्चिम यह निर्णय लिया है।

प्रदेश में हर साल बिजली की डिमांड बढ़ रही है। विशेषकर पिक अवधि में बिजली की डिमांड पांच हजार मेगावाट के पार जा रही है। इस वर्ष 13 अप्रैल को सबसे अधिक 53 सौ मेगावाट बिजली की डिमांड थी। 19वें इलेक्ट्रिक पावर सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 2036-37 तक प्रदेश में बिजली की आवश्यकता 76 हजार मिलियन यूनिट सालाना होगी।

जबकि वर्तमान में खपत 34 हजार मिलियन यूनिट हो रही है। वर्ष 2021-22 में 31 जनवरी तक प्रदेश में कुल बिजली की खपत 26070 मिलियन यूनिट हुई थी। इस तरह हर साल 10 से 15 फीसदी का इजाफा 2025-26 तक होगा। इसके बाद आगामी 10 साल तक बिजली की जरुरत में 25 से 30 फीसदी का इजाफा प्रतिवर्ष होगा। इस तरह 2035-36 तक बिजली की जररुत 76 हजार मिलियन यूनिट तक होगी।


50-50 मेगावाट की चार इकाइयां पहले से बंद
कोरबा में 50-50 मेगावाट की चार इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी है। 210- 210मेगावाट की चार इकाइयां आने वाले वर्षों में बंद हो जाएंगी। इससे प्रदेश में बिजली की समस्या खड़ी हो सकती है। प्रदेश सरकार को ऊंची दर पर निजी कंपनियों से बिजली खरीदनी पड़ सकती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने नया संयंत्र लगाने का निर्णय लिया है।


कोरबा में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस घोषणा से कोरबा में खुशी की लहर दौड़ गई है। श्रमिक संगठन लंबे समय से कोरबा में बिजली कंपनी का नया संयत्र स्थापित करने की मांग प्रदेश सरकार से कर रहे थे। इसेे लेकर छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन और छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन कर्मचारी महासंघ की ओर से लगातार प्रदेश सरकार से मांग की जा रही थी।