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साढ़े पांच साल में 2266 कोल कर्मियों की 60 वर्ष से पूर्व हो गई असामयिक मौत

बीते साढ़े पांच साल में 2266 कोल कर्मियों की जान अलग-अलग वजहों से जा चुकी है।

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कोरबा. कोल कर्मी बेहद चुनौतियों के साथ आज देश के लिए कोयला खनन कर रहे हैं। खदानों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं है। सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि कोल कर्मी 60 वर्ष की आयु तक पूरी नहीं कर पा रहे हैं। बीते साढ़े पांच साल में 2266 कोल कर्मियों की जान अलग-अलग वजहों से जा चुकी है।

खुद एसईसीएल ने वर्षवार कोल कर्मियों के मौतों का डाटा जारी किया है। वर्ष 2018-19 से लेकर 2023-24 सितंबर तक 2266 कर्मियों को एसईसीएल ने खोया है। शारीरिक रूप से एसईसीएल कर्मी लगातार कमजोर हो रहे हैं। बीपी, शुगर और एलर्जी से तो एसईसीएल कर्मी सबसे अधिक ग्रसित हैं। एसईसीएल बीते कुछ वर्षों में कोल खनन में हाइटेक संसाधनों को लागू किया गया है।


सरफेस माइनर, माइनर, हाइवाल माइनर टेक्नोलॉजी से खदानों में हाइटेक तरीके से कोल खनन किया जा रहा है। प्रबंधन का दावा रहता है कि खदान परिसर के भीतर प्रदूषण को रोकने, हादसों को कम करने के सारे उपाय किए जा रहे हैं इसका फायदा भी मिल रहा है, लेकिन एक सबसे बड़ी परेशानी अभी कोल कर्मियों को यही आ रही है कि खदान से घर आने व जाने मेें कोल कर्मी सबसे अधिक प्रदूषण, जर्जर सडक़ का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ों पर जाम, डस्ट और गड्ढों की वजह से उनके सेहत पर विपरित असर पड़ रहा है। यहां तक की कालोनी में मकान भी इस लायक नहीं है कि वे शांति और डस्ट रहित जीवन जी सके। कर्मियों की मांग है कि एक बेहतर माहौल उनको रहने को मिले।
646 एसईसीएल कर्मी हुए मेडिकल अनफिट

बीते साढ़े पांच साल में एसईसीएल के कुल 646 कर्मी मेडिकल अनफिट हो गए। स्वास्थ्य लगातार खराब रहने, विपरित परिस्थिति में काम करने में अक्षम, इलाज के लिए कई महीने छुट्टी के बाद भी ठीक नहीं होने पर खुद कर्मियों ने मेडिकल अनफिट के लिए आवेदन लगाया था। उनके आवेदन पर एसईसीएल ने परीक्षण कराने पर पाया कि कर्मी काम करने के योग्य नहीं है। मेडिकल अनफिट होने के बाद परिवार के सदस्यों को नौकरी पर रखा गया।

घट रहे कर्मचारी, बढ़ रहा टार्गेट
एक तरफ एसईसीएल में कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है तो दूसरी तरफ सालाना कोल खनन का टार्गेट हर साल बढ़ रहा है। ठेका मजदूरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। हालांकि पहले की तुलना में हाइटेक मशीनरियों की संख्या में इजाफा हुआ है इसकी वजह से मैनपॉवर की जरुरत पहले की तुलना में कम पड़ रही है।


महिला कामगारों की संख्या पहुंची तीन हजार तक
एसईसीएल में महिला कामगारों की संख्या अब तीन हजार के करीब पहुंचने वाली है। वर्तमान में एसईसीएल मेंं अलग-अलग वर्ग में कुल 2928 महिला कामगार कार्यरत हैं। इनमें एक्जीक्यूटिव स्तर पर 155, मासिक वेतन पर 878, सबसे अधिक दैनिक वेतन भोगी 1841, ट्रैनी के पद पर 54 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं।

कर्मियों के हेल्थ पर शोध की जरूरत
एसईसीएल कर्मियों के हेल्थ को लेकर एक शोध की बेहद जरुरत है। खदान के भीतर, आने जाने वाले रास्तों के अलावा कालोनी में प्रदूषण सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। डस्ट को कम करने के पीछे एक्सपर्ट तरीके से उपाय करने होंगे। कुसमुंडा, दीपका, गेवरा जैसे बड़ी परियेाजना में कार्यरत कर्मी सबसे अधिक प्रभावित हैं।

वर्षवार एसईसीएल कर्मियों की मौतों पर एक नजर
वर्ष कुल मौतें
2018-19 404
2019-20 331
2020-21 431
2021-22 643
2022-23 336
2023-24 121
कुल 2266
कुल कामगारों की संख्या पर एक नजर
2022 मार्च तक 44405
2023 मार्च तक 41832
2023 सितंबर तक 37942