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अमृतम् जलम् का समापन आज : प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने करेंगे श्रमदान

जल संरक्षण के लिए किया गया जागरूक
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कोरबा

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Shiv Singh

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Updated: 9 Jun 2018, 11:10 PM IST

अमृतम् जलम् का समापन आज : प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने करेंगे श्रमदान

अमृतम् जलम् का समापन आज : प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने करेंगे श्रमदान

कोरबा. पत्रिका समूह की ओर से प्राकृतिक जल स्रोतों के सरंक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान का रविवार को भव्य समापन होगा। इस अभियान में अब तक प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई करने के अलावा लोगों को व्यापक स्तर पर जागरूक भी किया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से पहुंच कर अपने-अपने क्षेत्रों में श्रमदान भी कर रहे हैं।
सामाजिक सरोकारों की कड़ी में एक और बड़ी पहल करते हुए पत्रिका समूह ने इस वर्ष भी अमृतम् जलम् अभियान की जोरदार तरीके से शुरूआत की। देश व्यापी समर्थन के कारण अब यह अभियान पत्रिका की बड़ी पहचान बन चुका है। जन-जन की आवाज बन चुका है और जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे कुआं, तालाब,नदी, झरने सहित आदि को संरक्षित करना है,उनकी देखभाल करना है ताकि वे कहीं उपेक्षित होकर जल स्रोत ही न बंद हो जाय,क्योंकि प्रकृति प्रदत्त ऐसी सभी धरोहरों का संरक्षण करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। पत्रिका समूह के इस अभियान में श्रमदान करने के लिए समाज के सभी वर्गों जैसे विद्यार्थी, युवक, पुरुष, महिलाएं, जन प्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी वर्ग तक उत्सुक रहते हैं और सभी इस अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लिया है और श्रमदान करके प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने का काम किया है।

ऊर्जाधानी में प्रथम चरण में पोड़ी बहार तालाब में श्रमदान करके व्यापक स्तर पर साफ-सफाई की गयी। अभियान के लिए निर्धारित की गयी अवधि में प्रत्येक रविवार को सुबह-सुबह ही इस तालाब की सफाई की गयी। इस अभियान में वहां के पार्षद प्रदीप जायसवाल और उनकी टीम के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में वार्डवासी व अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सेदारी की और काफी हद तक तालाब की सफाई की गयी। इस अभियान के दौरान तालाब में किसी प्रकार की गदंगी फेंकने वालों को भी समझाइश दी गयी कि वे इस प्राकृतिक जल स्रोत को किसी प्रकार से गंदा न करें बल्कि संरक्षित करने लिए अपने स्तर से जो भी बन पड़े, उसका प्रयास करें। लोगों ने इस बात को माना और संकल्प लिया कि वे न केवल तालाब बल्कि नदी व अन्य जल स्रोतों को कभी भी गंदा नहीं करेंगे और प्रकृति के साथ समन्वय बना रहेंगे। लोग इस अद्वितीय अभियान के लिए पत्रिका समूह को तहेदिल से धन्यवाद भी दे रहे हैं।