
भू-विस्थापित अपनी समयस्याओं के लिए सीएम से भी चार बार मिल चुके
कोरबा. जिले के एसईसीएल गेवरा, दीपिका, कुसमुंडा व कोरबा से प्रभावित भू- विस्थापितों ने अटल विकास यात्रा का बहिष्कार कर दिया है। संगठन के नेताओं ने बताया कि पूर्व में रेल व कोयला मंत्री से दो बार मुलाकात हो चुकी है। भू-विस्थापित अपनी समयस्याओं के लिए सीएम से भी चार बार मिल चुके हैं। इसलिए हरदीबाजार क्षेत्र के 42 गांव के चार हजार भू विस्थापितों के साथ ही आठ से नौ हजार लोग सीएम की अटल विकास यात्रा में शामिल नहीं होंगे।
24 सितंबर को अटल विकास यात्रा के तहत मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और केन्द्रीय कोयला व रेल मंत्री पीयूष गोयल का प्रवास ग्राम हरदी बाज़ार में हो रहा है। इस विकास यात्रा में भू विस्थापित संगठन व एसईसीएल से प्रभावित किसानो ने शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है। विस्थापितों ने कहा है कि रोजगार, मुआवजा व पुनस्थापना से संबधित अनेक समस्या यथावत बनी हुई है। विस्थापितों द्वारा अटल विकास यात्रा के बहिष्कार से भीड़ जुटाने में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आस-पास के बजाए अन्य क्षेत्रों से लोगों को ढोकर सभा स्थल तक लाना पड़ सकता है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल के हाथों 24 सितंबर को हरदीबाजार वाली सभा में पांच रेल परियोजनाओं का शिलान्यास कराने की तैयारी है। जिसमें गेवरा रोड-पेंड्रारोड, उरगा-धरमजयगढ़, चिरमिरी-छोटा नागपुर, खरसिया-धरमजयगढ़ और अनूपपूर से चिरमिरी के बीच तीसरी लाईन शामिल है। हालांकि इस सभी परियोजनाओं का कार्य विगत लंबे समय से जारी है। लेकिन चुनावी साल में मंत्री के हाथों इनका शिलान्यास कराया जा रहा है।
जिनमें जिले के लिए सबसे महत्वपूर्ण है इस्ट वेस्ट रेल कॉरीडोर गेवरा रोड-पेंड्रारोड जिसके दायरे में 22 गांव आ रहे हैं। ये ऐसे गांव हैं, जहां पहली बार रेल गाड़ी दौड़ेगी। परियोजना में 1650 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
परियोजना का क्रियान्वयन होने से उन गांव के लोगों की कनेक्टिविटी मुख्य रेल लाइन से हो जाएगी। जिसका लाभ उन्हें सुगम आवागमन के रूप में मिलेगा। गेवरारोड से पसान के बीच पडऩे वाले 22 गांव के बीच 9 स्टेशन (हाल्ट) बनेंगे। यात्री ट्रेन चलने से 9 स्टेशनों के साथ पोड़ी उपरोड़ा, पाली व कटघोरा ब्लॉक के और भी गांव के लोगों को लाभ मिलने लगेगा। प्रस्तावित रेल कॉरिडोर 121.7 किलोमीटर लंबी है।
दिल्ली तक गए फिर भी नहीं हुआ समाधान
ऊर्जाधानी भू विस्थापित संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह सभी चार बार मुख्यमंत्री से व दो बार केन्द्रीय कोयला मंत्री से मिल चुके हैं। सांसद डॉ बंशीलाल महतो की अगुवाई में सभी ने कोयला मंत्री से मिलने के लिए दिल्लीत तक का सफर किया। एसईसीएल गेवरा ,दीपका ,कुसमुंडा व कोरबा से प्रभावितो की समस्या से अवगत कराया था।
-मुख्य समस्या के बजाए गैस कनेक्शन, मोबाईल आदि बांटने के लिए अटल विकास यात्रा में केन्द्रीय रेल व मुख्यमंत्री आ रहे हैं। हमें मुआवजा व रोजगार चाहिए। एसईसीएल से संबंध मुख्य समस्या पर कोई बात नहीं हो रही है। 42 गांव के आठ से नो हजार लोग अटल विकास यात्रा में शामिल नहीं होंगे।
-सुरेंद्र राठौर, अध्यक्ष, ऊर्जाधानी भू विस्थापित संगठन
Updated on:
22 Sept 2018 10:49 am
Published on:
22 Sept 2018 10:49 am
