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गेवरा खदान में ब्लॉस्टिंग से फिर कांप उठा भिलाई बाजार

कोरबा. खदानों होने वाली ब्लॉटिंग आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। ब्लॉस्टिंग की क्षमता अधिक होने से आसपास के गांव की जमीन ढोल जा रही है। इससे दीवारों में दरार पड़ रही है।

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गेवरा खदान में ब्लॉस्टिंग से फिर कांप उठा भिलाई बाजार

गेवरा खदान में ब्लॉस्टिंग से फिर कांप उठा भिलाई बाजार

इससे खदान के आसपास रहने वाले लोग परेशान हैं। नया मामला भिलाई बाजार का है। गांव की पूरी जमीन अधिग्रहित करने, बेरोजगार युवकों को ठेका कंपनियों में नौकरी और ब्लॉस्टिंग की क्षमता को कम करने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने शनिवार को उमेंदीभाठा फेस पर गाड़ियों का परिचालन रोक दिया था। मांग पर चर्चा के लिए स्थानीय लोग की गेवरा प्रबंधन के साथ प्रशासन की मौजूदगी में चर्चा हुई थी।

इसके बाद लोगों ने आंदोलन को स्थगित कर दिया था। गांव के लोगों ने बताया कि आंदोलन स्थगित करने के बाद घर पहुंचे ही थे कि शनिवार की शाम लगभग ५.१५ बजे गेवरा खदान में प्रबंधन की ओर से उमेंदीभाठा फेस पर ब्लॉस्टिंग की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ब्लॉस्टिंग की क्षमता इतनी अधिक थी कि भिलाई बाजार के आसपास की धरती डोल गई।

ग्रामीणों ने बताया कि हेवी ब्लॉस्टिंग का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। दोपहर लगभग 2.50 में हेवी ब्लास्टिंग हुई । बार बार होने वाली ब्लाटिंग से घरों में दरार पड़ गई है। दुर्घटना की आंशका से लोग डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ पहले हुई ब्लॉस्टिंग से भिलाई बाजार में एक स्कूल का प्लाटर गिर गया था। प्रबंधन की ओर से १० दिन में स्कूल की मरम्मत कराने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।

घटना से नाराज भिलाई बाजार के लोगों ने सूचना गेवरा प्रबंधन को दी है। लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है।

सिगड़ी की धुंआ से एक परिवार के चार सदस्य हुए बीमार अस्पताल में इलाज जारी

कोरबा. सिगड़ी की धुंआ से एक ही परिवार के चार सदस्य बीमार हो गए। बेहोशी की हालत में सभी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना शहर से लगे ग्राम नकटीखार की बताई जा रही है। राजकुमार एक किराय की मकान में रहता है। घर में राजकुमार की तीन बेटी दुर्गा, दुर्गेश्वरी और किरण के अलावा पुत्र दुर्गेश भी था।

खाना खाने के बाद सभी घर में सोए हुए थे। इस बीच दुर्गा और दुर्गेश्वरी को उलटी होने लगी। किरण और दुर्गेश बेहोश हो गए। उनकी स्थिति ऐसी भी नहीं थी कि पिता राजकुमार को सूचना दे सकें। थोड़ी देर बाद राजकुमार घर पहुंचे।

काफी खटखटाने के बाद भी अंदर कोई आवाज नहीं आई। आसपास के लोगों की मदद से दरवाजा खोला गया। बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। बताया जाता है कि खाना बनाने के लिए घर में कोयले की सिगड़ी जलाई गई थी। आशंका है कि कोयले की धूंआ से बेहोश हुए हों।