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बाली उम्र में किशोरी बनी सिपाही की हवस का शिकार, ब्याह के बाद केस दर्ज

नाबालिग को प्रेम जाल में फंसाकर सिपाही ने हवस का शिकार बनाया। बाद में शादी से इनकार किया। नाबालिग ने थाने में शिकायत की। सिपाही शादी को राजी हो गया।

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कोरबा

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Shiv Singh

Aug 25, 2017

कोरबा. नाबालिग को प्रेम जाल में फंसाकर सिपाही ने हवस का शिकार बनाया। बाद में शादी से इनकार किया। नाबालिग ने थाने में शिकायत की। सिपाही शादी को राजी हो गया। लेकिन लड़की के परिवार ने शादी से इनकार कर दिया। लड़की ने दूसरे संग ब्याह रचा ली। पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अफसरों ने फटकार पर केस दर्ज हुआ। इसमें करीब डेढ़ साल का समय गुजर गया। सिपाही की मुश्किले बढ़ गई है। साथ की रिपोर्ट लिखाने वाली लड़की भी अपने भविष्य को चिंतित है।

मामला करीब डेढ़ साल पुराना है। कोतवाली थाना क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की ने सिपाही बलराम सागर के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

इसकी शिकायत विभागीय अफसरों से की थी। पुलिस मामले की जांच कर रही थी। सिपाही ने अपने बयान में ब्याह रचाने की इच्छा जताई थी। लेकिन बाद में लड़की ने सिपाही बलराम संग शादी करने से मना कर दिया था। मामले ठंडे बस्ते में पड़ गया था।

इसबीच जांच में पता चला कि जिस समय दुष्कर्ष की घटना हुई थी, उस समय लड़की नाबालिग थी। उसकी उम्र 18 साल से कम थी। पुलिस ने जांच के बाद सिपाही के खिलाफ दुष्कर्म और लैंगिक अपराध से बालको का संरक्षण अधिनियम की धारा छह के तहत केस दर्ज किया है।

इधर, डेढ़ साल बाद लड़की उम्र 18 वर्ष को पार कर गई है। बालिग होने के बाद उसने दूसरे युवक संग ब्याह रचा ली है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना कि कानूनी कार्रवाई सिपाही के खिलाफ होगी।

फिर दागदार हुई खाकी- संगवारी के जरिए पुलिस छबि सुधार की कोशिश में लगी है। इसके लिए सभी थाना क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को पुलिस की गतिविधियां बताई जाती है।

पुलिस आमलोगों से जुडऩे की कोशिश करती है। लेकिन खाकी के दामन पर दुष्कर्म की दाग ने छबि को धूमिल किया है। इसके पहले करतला थाने में पदस्थ एक सिपाही पर केस दर्ज किया गया है।

उसपर युवती ने छेडख़ानी का आरोप लगाया था। रामपुर चौकी में पदस्थ एक सिपाही को भी पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था। साल में एक दो एफआईआर पुलिस कर्मियों के खिलाफ लिखी जाती है। लेकिन छबि सुधार को लेकर अंदरूनी स्तर पर कोशिश नहीं होने से विभाग की बदनामी हो रही है।