
CG News: सरिता दुबे। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की भूमि गुप्ता ने 8 साल की उम्र में गर्मियों की छुट्टियों में स्विमिंग कैंप में तैराकी सीखना शुरू किया और यही खेल उनका जुनून बन गया। हाल ही 38वें राष्ट्रीय खेलों में भूमि ने तैराकी में पहला पदक दिलाया है। यह पदक छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद पहली बार तैराकी में मिला है।
इसके अलावा हल्द्वानी में आयोजित प्रतियोगिता में भूमि ने 200 मीटर आईएम में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश की पहली नेशनल गेम्स पदक विजेता तैराक बनीं। कंधे की सर्जरी के बाद खेल से कुछ समय दूर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मेंटल हैल्थ ट्रेनिंग लेकर खुद को फिर से तैयार किया और शानदार वापसी की। भूमि कहती हैं, ‘लड़कियों को कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए और इसके लिए परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है।’
भूमि 2017 में हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के लिए मुंबई शिफ्ट हो गईं, जहां उन्होंने पढ़ाई और ट्रेनिंग दोनों जारी रखी। 2018-19 में दिल्ली में हुई एसजीएफआई नेशनल स्विमिंग चैंपियनशिप में उन्होंने दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीते। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से उन्हें खेलो इंडिया एथलीट स्कॉलरशिप ट्रेनिंग स्कीम में आठ साल के लिए चुना गया, जिसके तहत उनकी ट्रेनिंग और पढ़ाई पर हर साल 5 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं।
सोच यह: लड़कियों को कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए
अब देश के लिए पदक जीतना है अभी भूमि दिल्ली में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हाई परफार्मेंस रेजिडेंशियल एकेडमी के हेड कोच पार्थ प्रतीक मजूमदार से ट्रेनिंग ले रही हैं। भूमि कहती हैं कि अभी अपने प्रदेश के लिए पदक जीती हूं, अब देश के लिए जीतना है।
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Updated on:
09 Feb 2025 02:11 pm
Published on:
09 Feb 2025 02:09 pm
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