
CG News: कोरबा में जमीन के चलने (एक भूखंड का नंबर दूसरे स्थान पर सेट) की चर्चा खूब होती है लेकिन अब जिंदा रहते हुए भी मृत बताकर जमीन बेचने का खेल शुरू हो गया है। इसी तरह के एक मामले में कोरबा के कोर्ट ने चार लोगों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने संबंधितों के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है। इसकी जांच कर रही है।
CG News: पुलिस की ओर से बताया गया है कि जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है उसमें बालकोनगर इंदिरा मार्केट के पास रहने वाला पवन अग्रवाल, पश्चिम नगर सुदर्शन पार्क नई दिल्ली का रहने वाला दिनेश सिंह गहलोन, हाउसिंग बोर्ड कालोनी बालकोनगर निवासी संजय कुमार सोनी और नेहरू नगर कोरबा का रहने वाला संदीप शर्मा शामिल हैं।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने चारों के विरूद्ध आईपीसी की धारा 420(धोखाधड़ी), 467 (जाली दस्तावेज), 468 (जाली दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल करना), 471 (जानबूझकर इस्तेमाल करना), 120बी/34 (साजिश) के तहत केस दर्ज किया है।
बालकोनगर थाने में दर्ज मुकदमे में बताया गया है कि बालकोनगर में रहने वाले नवीन गोयल ने रिस्दा स्थित लगभग 7 डिसमिल जमीन खरीदने के लिए एक सौदा किया। सौदा 15 लाख रुपए में तय हुआ था। अप्रैल 2023 को दो गवाहों के समक्ष दो लाख रुपए नगद जमीन की रजिस्ट्री के लिए दिए गए थे, लेकिन समय पर इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई। इसी बीच एक दिन गोयल उरगा की तरफ जा रहे थे। उन्होंने देखा कि जिस जमीन के लिए उन्होंने सौदा किया है उस जमीन पर 6-7 लोग खड़े होकर नापी कर रहे हैं।
CG News: इस पर गोयल ने आपत्ति दर्ज कराई तब वहां मौजूद एक व्यक्ति गणेश सिंह गहलोत ने कहा कि यह मेरी जमीन है, जिसे दिनेश सिंह गहलोन और उसके साथियों ने मृत बताकर जमीन का नामांतरण राजस्व विभाग के साथ मिलकर अपने नाम पर करा लिया है, तब नवीन ने इस मामले को लेकर पवन से संपर्क किया। तब पवन ने यह कहते हुए जमीन की रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया और कहा कि वह न तो जमीन की रजिस्ट्री कराएगा और न ही पैसे लौटाएगा।
तब नवीन ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की। लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसने कोर्ट में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों के विरूद्ध केस दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट में इस मामले की पैरवी पीड़ित पक्ष की ओर से प्रिंस अग्रवाल ने की।
CG News: इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया है। कहा है कि जिंदा व्यक्ति को मृत बताने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए गए और इसके आधार पर राजस्व रिकार्ड में बदलाव किया गया। लेकिन पुलिस के समक्ष जब यह मामला आया तब पुलिस ने इसे आपसी लेन-देन और सिविल प्रकृति का विवाद माना, जो पूर्णता त्रुटिपूर्ण है। कोर्ट ने कहा है कि थानेदार ने अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन विधि अनुसार नहीं किया। इसके लिए थाना प्रभारी विभागीय रूप से उत्तरदायी है।
थाने में दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि दिनेश सिंह गहलोन गणेश का पुत्र नहीं है फिर भी उसने राजस्व विभाग के साथ मिलकर एक वंशवृक्ष तैयार कराया और इस वंशवृक्ष पर दिनेश को पुत्र बताया। इसी को आधार बनाकर जमीन का रिकार्ड दिनेश ने अपने नाम पर करा लिया और इस जमीन की बिक्री के लिए एक मुख्तियारनामा तैयार कराया गया। जमीन बिक्री के लिए अधिकृत किया गया।
Updated on:
07 May 2025 01:13 pm
Published on:
07 May 2025 01:13 pm
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