
कोरबा. अरघ ले लीं हे छठी मईया, … चल घाट छठी मईया के, हम छठ करब..माथे दउरा उठाई के… सुन ली पुकार छठी मइया हमार…। कांच ही बांस के बहगिया, बंहगी लचकत जाए… जैसे लोकगीत मंगलवार को शहर के गली-मोहल्लों व सड़क पर गूंज रहे थे। कहीं बाजे पर तो कहीं गीत के स्वरूप में शाम को अघ्र्य देने जाते हुए, कोसी भरते हुए व अघ्र्यदान के समय व घाट पर गूंज रहे थे। छठ महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अघ्र्य अर्पित किया गया। इसके लिए शहर और उपनगरीय इलाके के छठ घाटों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंगलवार की शाम को व्रतियों की भीड़ छठ घाटों पर जुटनी शुरू हुई। व्रती, सूप और दउरा में पूजा सामग्री लेकर घाटों में सपरिवार पहुंचे। डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया।