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एल्यूमिनियम पार्क : दावे थे लोहे से मजबूत, पर 18 साल बाद भी सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही फाइल

- नेता मंत्री बने सांसद और विधायक जमीन पर पार्क को विकसित नहीं करा सके

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एल्यूमिनियम पार्क : दावे थे लोहे से मजबूत, पर 18 साल बाद भी सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही फाइल

एल्यूमिनियम पार्क : दावे थे लोहे से मजबूत, पर 18 साल बाद भी सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही फाइल

कोरबा. एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना से जुड़ी फाइल १८ साल से सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही है। नेता मंत्री बने सांसद और विधायक जमीन पर पार्क को विकसित नहीं करा सके हैं। प्रदेश की भाजपा की सरकार ने एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना कोरबा में करने का निर्णय लिया था। १५ साल तक प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद भाजपा प्रदेश की सत्ता से बाहर हो गई। लेकिन कोरबा में एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना को मूर्त रूप नहीं दे सकी।

पार्क की स्थापना के लिए सरकार ने जिला प्रशासन से स्थान चिन्हित करने को कहा था। तीन साल पहले तत्कालीन कलेक्टर रीना बाबा कंगाले के निर्देश पर कोरबा एसडीएम ने बालकोनगर में रुकबहरी के आसपास जमीन की तलाश चालू की थी। इसके लिए ग्राम सभा का आयोजन भी किया था। बाद में शासन प्रशासन ने पार्क की स्थापना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। तब से एल्यूमिनियम पार्क का मुद्दा खटाई में पड़ गया है।

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140 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता
एल्यूमिनियम से संबंधित लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2001 में एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना का कॉन्सेप्ट तैयार किया गया था। बालको और राज्य शासन के बीच एक समझौता भी हुआ था कि लघु उद्योगों को कंपनी, कच्चे एल्यूमिनियम की खरीदी पर डिस्काउंट देगी वहीं राज्य शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाएगी। पार्क के लिए लगभग 140 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता थी।

पहले रिसदी स्थित देबू पॉवर प्लांट को आबंटित जमीन, उपलब्ध कराने की डिमांड की गई थी। कलक्टर ने इसकी अनुशंसा भी कर दी थी। बाद में इस जमीन के लिए बिजली कंपनी द्वारा भी आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसे देखते हुए देबू ने हाईकोर्ट की शरण ली। जमीन संबंधी मामला न्यायालय में जाकर लटक गया। उस समय के कलक्टर गौरव द्विवेदी द्वारा ग्राम नुनेरा में एल्यूमिनियम पार्क के लिए जमीन चिन्हांकित की गई, ङ्क्षकतु बड़े झाड़ के जंगल की अड़चन ने काम अटका दिया।

एक दशक बाद भी एल्यूमिनियम पार्क के लिए जमीन संबंधी अड़चनों को दूर नहीं किया जा सका है। जिला उद्योग संघ एवं चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने इसके लिए काफी प्रयास किया। न प्रशासन और न ही शासन स्तर भूमि उपलब्ध कराने गंभीर प्रयास किए गए, जबकि इस बीच खासकर निजी बड़े उद्योगों को कई सौ एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई। भारत एल्यूमिनियम कंपनी कोरबा के संयंत्र से सालाना साढ़े तीन लाख टन से अधिक कोयले का उत्पादन करती है। पार्क की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।