
आंगनबाड़ी
कोरबा. डीएमएफ फंड से दो विभागों ने ५३ आंगनबाड़ी केन्द्र बनाएं गए। एक विभाग ने टेंडर कर बनाया तो दूसरे ने बगैर टेंडर के। एक ने प्रति केन्द्र ५.९३ की लागत से बनाया तो दूसरे ने ६.४५ लाख के हिसाब से काम करवाया। जबकि दोनों ही विभाग के आंगनबाड़ी केन्द्रों की ड्राइंग-डिजाइन तक एक समान है।
जिला खनिज न्यास मद से जिले भर में कुल ५३ आंगनबाड़ी केन्द्र भवन के निर्माण की स्वीकृति दी गई। ५३ में २६ केन्द्र का निर्माण नगर निगम द्वारा कराया जा रहा है जबकि शेष ३७ केन्द्रों को जनपद पंचायतों द्वारा बनाया जा रहा है। ५३ आंगनबाड़ी केन्द्रोंं की लागत छह लाख ४५ हजार रुपए रखी गई थी। नगर निगम द्वारा बनाए जा रहे सभी २६ केन्द्रों के निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया और सभी भवन ८ फीसदी बिलो रेट पर गए। इस लिहाज से हर भवन के पीछे ७५ हजार रुपए निगम ने बचा लिए जबकि जनपदों ने उसी रेट पर बगैर टेंडर के निर्माण कराया। इसकी लागत ६.४५ लाख ही रही। कुल मिलाकर अगर टेंडर कर निर्माण कराया जाता तो २६ भवन के पीछे कम से कम २० लाख रुपए बच जाते।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण की सबसे बड़ी जवाबदारी आरईएस की होती है। गांवों में छिटपुट निर्माण जनपदों के माध्यम से ही होते हैं। आरईएस के पास पर्याप्त इंजीनियर भी हैं। आरईएस ने ही इन जनपदों में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केन्द्रों का ड्राइंग डिजाइन व स्टीमेट तय किया था। आरईएस टेंडर कर विधिवत निर्माण करना चाहता था। लेकिन अफसरों ने जानबूझकर इस काम को जनपदों को दिया गया। दरअसल जनपदों में टेंडर बिना किए निर्र्माण की अनिर्वायता नहीं है। बिना टेंडर किए उसी रेट पर काम किए गए। अगर आरईएस टेंडर करता तो कम से कम ५० हजार रुपए हर भवन के पीछे बच जाते।
रेट बढ़ाने के लिए एसओआर को आड़े लिया, लेकिन टेंडर भूले
अफसरों ने एसओआर २०१५ रेट की आड़ लेकर आंगनबाड़ी केन्द्रों के निर्माण का रेट बढ़ा दिया। ४.५० लाख की जगह ६.४५ लाख रुपए इसकी लागत तय कर दी। जब पीडब्ल्यूडी के एसओआर रेट को इसका आधार माना गया। तब उसी पीडब्ल्यूडी के एसओआर नियमों के मुताबिक टेंडर तो अनिवार्य रूप से करना था। एक प्रकार से रेट बढ़ाने के लिए एसओआर का बहाना बता दिया गया लेकिन जब बचत करने की बारी आई तो उसी नियम को अफसर भूल गए।
पाली जनपद के कार्यों की तीन बार जांच, फिर भी मिला अधिक काम
पाली जनपद पंचायत के कार्यों की अब तक तीन बार जांच हो चुकी है। खुद सांसद महतो ने एक बार समग्र विकास के कार्यों की जांच कराई थी। जिसमें लाखों रुपए की रिकवरी निकाली गई थी। अधिकारियों से लेकर सरपंच-सचिव सहित कई लोगों के नाम सामने आए थे। उसके बाद भी पाली को सबसे अधिक आंगनबाड़ी केन्द्र का निर्माण भी पाली जनपद को ही दिया गया। पाली को १८, कोरबा को ८, कटघोरा को ३ और पोड़ी को ४ केन्द्र बनाने दिया गया था।
-जनपद के कार्यों में टेंडर करने का प्रावधान नहीं होता, इसलिए बगैर टेंडर के कार्य हुआ है। गुणवत्ताहीन होने की शिकायत नहीं मिली है। जगतराम, प्रभारी सीईओ पाली
Updated on:
19 Jan 2019 11:57 am
Published on:
19 Jan 2019 11:54 am
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