
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का कमाल : 1400 शौचालय कागजों में बना कर डेढ़ करोड़ खा गए अफसर-सचिव व सरपंच
कोरबा. जिले में शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला हुआ है। 1400 शौचालयों का निर्माण कागजों में बताकर अफसरों, ग्राम पंचायतों के सचिव व सरपंचों ने राशि का बंदरबांट कर लिया। जिला पंचायत की टीम ने चार गांव में एक-एक घर जाकर सर्वे किया तब जाकर इस बड़े घोटाला से पर्दा हटा। अब जिला पंचायत इस मामले में कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
मनरेगा के तहत कोरबा जिले के पाली विकासखंड के चार गांव बांधाखार, मानिकपुर, बतरा और चैतमा में शौचालयों की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए जिला पंचायत के मनरेगा विभाग से पाली जनपद कार्यालय को राशि भी भेजी गई। वर्ष २०१६-१७ में यह निर्माण होना था। निर्माण दिसंबर 2017 में पूरा बताकर राशि भी आहरित कर ली गई। पिछले महीने जिला पंचायत की सामान्य सभा में कई सदस्यों ने इस मामले को उठाया था। इसके बाद सीईओ इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल व जिला पंचायत अध्यक्ष देवीसिंह टेकाम ने चार सदस्यीय टीम बनाकर उक्त चारों गांव के हितग्राहियों की सूची के हिसाब से जांच कराने के लिए भेजा। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट अब जिला पंचायत को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में इन चार गांव में शौचालय निर्माण के पीछे बड़ा घोटाले का खुलासा किया गया है। इन चारों ही गांव में कुल 2032 शौचालयों का निर्माण होना था।
मनरेगा का काम ठेकेदारों से कराया
मनरेगा के इस काम मेंं नियम मुताबिक स्थानीय जॉब कार्डधारियों से करवाना था। लेकिन पाली जनपद ने इस काम को दो ठेकेदार नरेन्द्र अग्रवाल व आर के इंटरप्राइजेस को दे दिया। इन दोनों ही ठेकेदारों को भुगतान किया गया। चैतमा मेंं महज सात लाख 20 हजार का आहरण करना था, लेकिन भुगतान हुआ 60 लाख रूपए का। वहीं मानिकपुर मेंं 2.40 लाख का भुगतान होना था तो चेक दिया गया 18 लाख का। बतरा में ३५ लाख का बिल बनना था तो इसमें ७१ लाख रूपए की मोटी रकम दी गई। वहीं बांधाखार ग्राम में 5 लाख अतिरिक्त दिया गया।
कहां कितने शौचालय बनने थे और कितने बने
पाली विकासखंड के ग्राम चैतमा में कुल 591 शौचालयों की स्वीकृति हुई थी। टीम ने अपनी जांच मेंं सिर्फ ६० शौचालय ही पूरे पाएं गए। जबकि कुछ निर्माणाधीन है अधिकांश जगह काम ही शुरू नहीं हुआ है। इसी तरह मानिकपुर गांव में कुल 140 शौचालयों का निर्माण होना था लेकिन बने सिर्फ 20 है। इसी तरह बतरा में काफी संख्या में लगभग 893 शौचालयों की स्वीकृति हुई थी इसमें महज 328 ही पूरे हुए हैं। बांधाखार में भी 400 शौचालय बनना बताया जा रहा है पर निर्माण महज 300 शौचालयों का ही हुआ है।
भुगतान में चला पूरा खेल
शौचालय निर्माण किए बिना भुगतान करने के मामले मेंं सुनियोजित तरीके से पाली जनपद सीईओ एमआर कैवर्त, परियोजना अधिकारी, चारों गांव के सरपंच, रोजगार सहायक व सचिवों ने मिलकर खेल खेला। रोजगार सहायक, सचिव व सरपंचों ने पूर्णता: की रिपोर्ट जमा कर दी। परियोजना अधिकारी व सीईओ ने इसका भुगतान कर दिया। जबकि स्पष्ट आदेश था कि बगैर जिओ टैगिंग व फोटो खींचकर डाले बिना भुगतान नहीं होना है।
-सामान्य सभा में सदस्यों ने इसका मुदद उठाया था, लिहाजा हमनें टीम बनाकर चारों गांव की जांच कराई। जिसमें यह फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें जनपद सीईओ से लेकर पीओ व सरपंच-सचिव तक शामिल है। कार्रवाई के लिए तैयारी की जा रही है।
देवी सिंह टेकाम, अध्यक्ष, जिला पंचायत कोरबा
-शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी। इस मामले में जो भी शामिल है उसके खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
मो. कैसर अब्दुल हक, कलेक्टर, कोरबा
Published on:
8 Jun 2018, 12:33 AM IST
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