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Breaking : ठिठुरन भरी ठंड से बचने सिगड़ी जलाकर सो गया परिवार, फिर जो हुआ जानकर कांप जाएगा रूह

- कुसमुंडा थाना क्षेत्र के आनंदनगर का मामला

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कोरबा

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Shiv Singh

Dec 18, 2018

Breaking : ठिठुरन भरी ठंड से बचने सिगड़ी जलाकर सो गया परिवार, फिर जो हुआ जानकर कांप जाएगा रूह

Breaking : ठिठुरन भरी ठंड से बचने सिगड़ी जलाकर सो गया परिवार, फिर जो हुआ जानकर कांप जाएगा रूह

कोरबा. ठिठुरती ठंड से बचने के लिए घर पर सिगड़ी जलाकर पूरा परिवार सो गया। सिगड़ी के धुएं से छह लोग बेहोश हो गए। सुबह जब पड़ोसी पानी भरने पहुंचे तो परिवार के सदस्य बेहोश पड़े हुए थे। अस्पताल पहुंचते तक एक की मौत हो चुकी थी। अन्य पांच लोगों मेेंं तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है। कुसमुंडा थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक ४७ आनंदनगर में रहने वाले वर्मा परिवार सोमवार को काफी अधिक ठंड होने की वजह से दिन में भी सिगड़ी जलाकर घर पर था। रात में भी बढ़ती ठंड को देखते हुए सिगड़ी को सुलगता हुआ छोड़ दिया गया।

घर पर एक मासूम बच्चा भी था, इसे ठंड से बचाने के लिए परिवार के किसी एक सदस्य ने एक और सिगड़ी जलाकर रख दिया। रात को पूरा परिवार खाना खाकर सो गया। पड़ोसी अक्सर वर्मा के घर पर ही पीने के लिए पानी भरने आते हैं। मंगलवार की सुबह जब पड़ोसी पहुंचे तो सब बेसुध पड़े हुए थे। आनन-फानन में डायल ११२ की मदद से सभी छह लोगों को जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां स्थिति में सुधार ना होते देख कोसाबाड़ी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों ने जयकरण वर्मा को मृत घोषित कर दिया। जबकि उसकी पत्नी कमला वर्मा ५० वर्ष, बेटा गुलशन वर्मा, बहु चन्द्रकुमारी वर्मा व डेढ़ माह का पोता, बेटी बबिता वर्मा की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। मृतक की पत्नी व पोता अब तक बेहोशी की स्थिति में है।
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पुलिस पहुंची मौके पर
जानकारी मिलने के बाद कुसमुंडा पुलिस आनंदनगर जांच करने पहुंची। बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य अगरबत्ती बनाने का काम करते थे। घर पूरी तरह से पक्का नहीं है। जिस कमरे में परिवार के सदस्य सो रहे थे। वहां की खिड़की बंद थी। रोशनदान भी नहीं है। जिस वजह से धुएं के बाहर निकलने का रास्ता नहीं था।

पड़ोसियों के चिल्लाने पर गुलशन बेहोशी की स्थिति में खोला दरवाजा
सुबह छह बजे जब पड़ोसी पानी लेने पहुंचे तो घर का दरवाजा बंद था। पड़ोसियों ने जब दरवाजे को जोर-जोर से पीटा तब जाकर मृतक का बेटा लगभग आधे घंटे बाद बेहोसी की हालत में दरवाजे को खोला। दरवाजा खोलने के बाद भी वह भी बेसुध हो गया। घर के अंदर धुंआ ही धुंआ भरा हुआ था। कोई बिस्तर पर बेसुध था तो कोई जमीन पर। दरवाजा खोलने में अगर और भी देरी होती तो पूरे परिवार के लिए और भी खतरा हो सकता था।