
कोरबा . कोरबा शहर को शासन अपने खर्च पर सुप्रीम स्मार्ट सिटी बनाना चाहती है। इसके लिए 5200 करोड़ रूपए का डीपीआर भी बनाया गया, लेकिन सरकार ने आज तक एक पैसा नहीं दिया। निगम के पास जितना भी फंड है उसके हिसाब से शहर की जरूरत व सुविधाएं पर इन तीन साल में जोर दिया गया है। कोरबा महापौर रेणु अग्रवाल सोमवार को महापौर कार्यकाल के तीन साल पूरा होने पर पत्रकारों से मुखातिब हुई।
इस दौरान महापौर ने बताया कि इस तीन साल में कम बजट में ज्यादा से ज्यादा और उसकी उपयोगिता भी अधिक हो सिर्फ इस पर ध्यान रख कर काम किया गया है। हम लक्ष्य लेकर चल रहे हंै कि हर बस्ती तक सड़क पहुंच जाए। हर जगह विद्युतीकरण, और 24 घंटे शुद्ध पानी मिले। इस लक्ष्य को हमने 3 साल में 75 फीसदी पूरा कर लिया है। दो साल से पहले ही सौ फीसदी लक्ष्य हासिल हो जाएगा। महापौर ने बताया कि शहर में एकमात्र गायत्री मंदिर में एक्यूप्रेशर पथ था। लोगों की मांग को देखते हुए शहर के 20 स्थानों पर एक्यूपे्रशर पथ बनाया गया है।
महापौर ने बताया कि प्रदेश के चुंंनिदा शहरों में एक मात्र कोरबा में गौमाता चौक इतना भव्य बनाया गया है। इसके दोनों तरफ सवा करेाड़ रूपए की लागत से गार्डन का निर्माण किया जा रहा है। हर साल 60 से 80 लाख रूपए की खर्च कम कर दी गई है। शहर को सुप्रीम स्मार्ट सिटी के लिए बनाए गए डीपीआर पर सवाल पर बताया गया कि निकाय मंत्री अमर अग्रवाल ने इसके लिए एमआईसी से प्रस्ताव मंगाया। इसमें एक पैसा कोरबा निगम को नहीं मिला है। प्रेस कांफ्रेंस में साथ में विधायक जयसिंह अग्रवाल ने बताया कि इस कार्यकाल में यह हो पाना मुश्किल है। लिहाजा कांग्रेस की सरकार आने के बाद ही इसे मूर्तरूप दिया जा सकेगा।
आउटसोर्सिंग से शहर में नहीं होगी राजस्व वसूली
महापौर रेणु अग्रवाल ने बताया कि एमआईसी से एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिसमें शासन द्वारा आउटसोर्सिंग से शहर में होने वाली राजस्व वसूली के खिलाफ एमआईसी सदस्यों ने मना कर दिया है। महापौर ने बताया कि बाहर की कंपनी शहर के लोगों से जबरन वसूली करेगी। निगम अपने स्तर पर राजस्व वसूली करेगी।
कमीशन नहीं, निष्ठा एप्स की वजह से सफाई ठेकेदार थे हड़ताल पर
एक सवाल के जवाब में विधायक जयसिंह अग्रवाल ने बताया कि कमीशन लेने वाली कोई बात ही नहीं है। विपक्ष द्वारा सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है। असल में शासन द्वारा निष्ठा एप्स से हाजिरी अनिवार्य कर दिया गया है। ठेकेदार इसके खिलाफ थे। इस वजह से ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया था।
निगम में बीजेपी के ठेकेदार अधिक : विधायक
विपक्ष हर बार भ्रष्टाचार का आरोप लगाता है। इसपर १५ साल बनाम तीन साल की जांच के लिए विपक्ष तैयार क्यों नहीं है। आखिर बीजेपी के पार्षद व अन्य नेता तीन साल में एक भी भ्रष्टाचार को सामने क्यों नहीं ला सके। विधायक जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि बीजेपी के लोग ही सबसे अधिक निगम में ठेकेदारी कर रहे हैं। उन्हें मालूम है काम की गुणवत्ता कैसी है?
Published on:
16 Jan 2018 11:40 am
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