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आकर्षक वेशभूषा में आए प्रभु श्री राम और किया रावण का वध, रावण दहन के साथ बिखरी दशहरा खुशियां

रावण दहन के कार्यक्रम का आयोजन

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रावण दहन के कार्यक्रम का आयोजन

रावण दहन के कार्यक्रम का आयोजन

कोरबा. असत्य पर सत्य व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी धूम-धाम से मनाई गई। शहर में शुक्रवार को आठ से दस जगहों पर रावण दहन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कहीं सौ फीट ऊंचा रावण बनाया गया था तो कहीं यंत्र चालित रावण लोगों को लुभा रहा था।


रावण दहन कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम व वानरों की शोभायात्रा निकाली गई। इस शेभायात्रा ने पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान पूरा शहर जय श्री राम के उद्घोष से गूंजायमान हो गया था। एनटीपीसी लाल मैदान में 105 फीट ऊंचा रावण का पुतला लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। ये पुतला गुर्रा रहा था, अपने दस सिरों को घुमा रहा था साथ ही मुंह से धुआं निकालते हुए राम को ललकार भी रहा था। यहां पर राम और रावण के बीच के युद्ध की जीवंत झांकी भी पेश की गई थी। इस दौरान की गई आतीशबाजी से पूरा आसमान सतरंगी पटाखों से जगमग हो उठा था।

इसी तरह कोसाबाड़ी फेस वन, एमपी नगर, पुराना बस स्टैंड, पुरानी बस्ती, मानिकपुर, रजगामार, छुरी, दीपका, सर्वमंगला नगर दुरपा, कटघोरा सहित नगरीय, उप नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक स्थानों में रावण दहन किया गया। पुराना बस स्टैंड में दशहरा उत्सव के बाद जसगीत का आयोजन हुआ। जबलपुर से आई नीतू बुंदेला के जसगीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।


की गई पूजा-अर्चना
इस दौरान समितियों की ओर से विशेष पूजा अर्चना का भी आयोजन किया गया इसके बाद रावण का दहन किया गया। मुड़ापार मैदान में 55 फीट ऊंचे रावण का पुतला बनाया गया था। ये पुतला अपना सिर हिला रहा था। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान व वानरों की जीवंत झांकी व कर्मा नृत्य के साथ थिरकते रहे।


ऐसे मना दशहरा
रावण दहन स्थल पर मेले जैसा नजारा था। इस दौरान बच्चों ने खिलौने और गुब्बारों की खरीदी भी की। बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल कर लौटे लोगों ने अपने घरों में बच्चो व परिजनों का तिलक लगाया। इसके बाद घर के बड़े-बुजुर्गो का आशीर्वाद लिया। शहर में देर रात तक चहल-पहल देखने को मिली।


यहां नीलकंठ को देखने लगती है भीड़
शहर के रिस्दी चौक के समीप हर साल दशहरे की शाम को श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। कारण है यहां नीलकंड लोगों को आसानी से दिख जाता है। ऐसी मान्यता है कि दशहरा के दिन नीलकंठ को देखना शुभ संकेत होता है। रिस्दी में नीलकंठ आते-जाते रहते हैं। जिसे देखने के लिए हर साल दशहरा की शाम अंधेरा होने के पहले शहरवासी यहां नीलकंठ को देखने के लिए एकत्र होते हैं।


माता की नौ रूपों की उपासना के बाद विदाई का दौर शुरू
कोरबा ञ्च पत्रिका. नौ तिथियों तक मां शक्ति की आराधना के बाद दशमी के दिन शहर के कई दुर्गा पंडालों में मां दुर्गा को विदाई दी गई। इसको लेकर विशेष तैयारी की गई थी। वाहनों को रंग-बिरंगे गुब्बारे, फूल-मालाओं से सजाया गया था। डीजे की धुन पर नाचते हुए भक्त विसर्जन के लिए निकले थे। इस दौरान जय माता दी के जयकारे गूंज रहे थे। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्र प्रारंभ हो गई थी। समितियों ने भव्य पंडाल तैयार कर मां आदिशक्ति की प्रतिमा स्थापित की थी।


पूरे नौ तिथियों तक हर्षोल्लास से पूजा-अनुष्ठान किया गया। दशमी को यानि शुक्रवार को शहर की कई दुर्गा समितियों ने मां आदिशक्ति को विदाई दी गई। विदाई का कार्यक्रम भी काफी भव्यता के साथ आयोजित किया गया। ऐसा नजारा पावर हाउस रोड, टीपी नगर, मेन रोड, एनटीपीसी, कोसाबाड़ी सहित अन्य क्षेत्रों में देखने को मिला। शहर के हसदेव नदी के सर्वमंगला तट, इमलीडुग्गू, पुरानी बस्ती, ढेंगूरनाला, दर्री रोड सहित अन्य क्षेत्र के नदी व तालाब में दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया गया।