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हाथियों ने फिर मचाया उत्पात, पहले स्कूल का बाउंड्रीवाल तोड़ा, फिर दो मकानों पर बोला धावा

- कटघोरा वनमंडल के मोरगा रेंज में ग्राम पंचायत खिटरी में जमे हाथी - लोगों के बीच दहशत

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हाथियों ने फिर मचाया उत्पात, पहले स्कूल का बाउंड्रीवाल तोड़ा, फिर दो मकानों पर बोला धावा

कोरबा . मोरगा रेंज में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महिला को मारने के बाद रविवार को हाथियों ने स्कूल की बाउंड्रीवाल को तोड़ दी। तो वहीं दो मकानों को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। पांच गांव के लोगों के बीच दहशत व्याप्त है। कटघोरा वनमंडल के अन्र्तगत मोरगा वनपरिक्षेत्र में आने वाले गांव में अब तक कभी हाथियों का मूवमेंट काफी कम रहा है। जब भी इस क्षेत्र में हाथी पहुंचे हमेशा उदयपुर रेंज से होते हुए हाथी यहां पहुंचकर उत्पात मचाते थे। इस बार भी उदयपुर रेंज में तीन लोगों को मारने के बाद दो हाथी पिछले चार-पांच दिन से मोरगा के आधा दर्जन गांव में विचरण कर रहे हैं। दिन भर जंगल में रहने के बाद हाथी शाम होते ही जंगल से लगे गांव में घुसकर मकान को तोड़कर धान खा जा रहे हैं।

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गुरूवार की रात को भी धान की खुशबू के साथ हाथी केन्दई के पास पहुंचे और एक मकान को तोड़ दिया। मकान के अंदर सो रही महिला दब गई जिससे उसकी मौत हो गई। इसके एक दिन पहले तीन मकानों को भी क्षतिग्रस्त किया था। इन दो घटना के बाद जहां ग्रामीणों की नींद उड़ गई है इसी बीच हाथियों ने शनिवार की भोर में खिटरी ग्राम पंचायत में जमकर उत्पात मचाया है। यहां पर एक स्कूल की बाउंड्रीवाल को पहले निशाना बनाया। इसे तोडऩे के बाद बस्ती में घुसकर दो लोगों के मकान को भी तोड़ दिया।
इन बस्तियों में खतरा ज्यादा
इस रेंज में खिटरी, पंडराआमा, उचलंगा, कछार, केन्दई, अरसिया, फदुरियाडांड, अंडीकछार सहित अन्य रेंज में हाथियों की चहलकदमी जारी है। इस क्षेत्र में हाथियों के नहीं के बराबर आने की वजह से अब तक वन विभाग द्वारा किसी प्रकार की तैयारी नहीं रखी जाती है। इसी वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। यहां तक की ग्रामीणों को समय पर मुनादी नहीं हो रही है। ग्रामीणों को हाथियों के लेाकेशन तक नहीं मालूम। वहीं विभाग भी दो हाथियों को खदेडऩे में नाकाम साबित हो रहा है।

पानी पर्याप्त, धान भी इसलिए नहीं छोड़ रहे जगह
दरअसल यह क्षेत्र बांगो बांध के डुबान से लगा हुआ है। कई छोटे-बड़े नाले भी है। गर्मी शुरू हो चुकी है। हाथियों को पर्याप्त पानी मिलने की वजह से वे आसानी से एक क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्र नहीं जा रहे हैं। वहीं लोग फसल काटने के बाद धान को अपने घर या फिर बाड़ी में रखे हुए है। इसकी महक से हाथी जंगल तक पहुंच रहे हैं।