
कोरबा . महत्वकांक्षा बढ़ोत्तरी और सहशीलता में आ रही कमी से घरेलू हिंसा का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जरूरत से अधिक मोबाइल फोन से लगाव और सोशाल साइट से जुड़ाव भी इसमेें बढ़ोत्तरी का बड़ा कारण है। यह कहना है वरिष्ट महिला अधिवक्ता मुध पांडे का। गुरुवार को पांडे पत्रिका के टॉपिक ऑफ द डे कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने घरेलू हिंसा क्या है? इसका निराकरण कैसे हो? इस पर अपनी राय दी।
पांडे ने बताया कि महिलाओं के घर में होने वाली उत्पीडऩ घरेलू हिंसा है। यह उत्पीडऩ मानसिक, शारीरिक या आर्थिक हो सकती है। शिशु पैदा नहीं होने पर महिला को ताना मारना मानसिक प्रताडऩा है। मारपीट शरीरिक प्रताडऩा की श्रेणी में आता है। महिला को काम करने से रोका जाना आर्थिक प्रताडऩा है।
उन्होंने कहा कि कोरबा में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा तेजी से बढ़ रहा है। पुलिस से लेकर कचहरी तक घरेलू ङ्क्षहसा से संबंधित प्रकरणों में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों में प्रताडऩा से संबंधित मामले खुलकर सामने आ जाते हैं, लेकिन हाई प्रोफाइल वर्ग की महिलाएं चुप रहती हैं। इसका कारण परिवार प्रतिष्ठा हनन का भय होता है।
पांडे ने बतया कि घरेलू ङ्क्षहसा के लिए महिलाएं ही नहीं पुरुष भी दोषी होते हैं। आजकल जमाना बदल रहा है। लोगों में सहनशीलता घट गई है। महिला हो या पुरुष, मोबाइल और सोशल मीडिया पर अधिक समय गुजार रहा है। इससे पति-पत्नी में दरार पैदा हो रही है। दोनों एक-दूसरे को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। एक बार संदेह पैदा हो गया तो इसे दूर करना काफी मुश्किल होता है। लोगों को सोशल मीडिया का उपयोग जरूरत से अधिक नहीं करनी चाहिए। बेटी के ससुराल में माता-पिता की होने वाली दखल भी कुछ हद तक प्रताडऩा के लिए दोषी है। उन्होंने कहा कि हाल ही एक मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा था।
इसमें पाया गया कि शादी के बाद माता-पिता बेटी को फोन के जरिए रोज गाइड करते थे। बेटी ससुराल में होने वाली छोटी छोटी घटना मोबाइल पर अपने माता-पिता को बताती थी। इसका दुष्परिणाम हुआ कि बेटी ससुराल में प्रताडि़त होने लगी। एक स्थिति ऐसी आई की बेटी को ससुराल से बाहर जाना पड़ा। उसका परिवार टूट गया। उन्होंने कहा कि परिवार की समझदारी से घरेलू ङ्क्षहसा के मामले कम होंगे। इसके रोकने में मदद मिलेगी।
Updated on:
01 Feb 2018 02:13 pm
Published on:
01 Feb 2018 02:10 pm
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