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पीएम आवास के नाम पर सरपंच ने हितग्राहियों से लिया रुपया, वहीं आवास मित्रों ने भी लगाया चूना, पढि़ए खबर…

-बुधवार को कोरबा जनपद पंचायत कार्यालय में कुल 36 गांव की सामाजिक अंकेक्षण की टीम द्वारा रखी गई थी जनसुनवाई

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पीएम आवास के नाम पर सरपंच ने हितग्राहियों से लिया रुपया, वहीं आवास मित्रों ने भी लगाया चूना, पढि़ए खबर...

कोरबा . पीएम आवास के नाम पर सरपंच ने जहां हितग्राहियों से 2-2 हजार रूपए की घूस ली। तो वहीं आवास मित्रों ने भी हितग्राहियों को चूना लगाया है। 8 ग्राम पंचायत में फर्जी नाम और फर्जी उपस्थिति की आड़ में लाखों रूपए मनरेगा का निकाल लिया गया। सोशल ऑडिट द्वारा कोरबा जनपद में रखी गई जनसुनवाई में कुल 11 गांव में साढ़े तीन लाख रूपए की वसूली सामने आई है।

बुधवार को कोरबा जनपद पंचायत कार्यालय में कुल 36 गांव की सामाजिक अंकेक्षण की टीम द्वारा जनसुनवाई रखी गई थी। सामाजिक अंकेक्षण की टीम द्वारा हर गांव में जाकर समाज के बीच सर्वे करती है। सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल किया जाता है। जनसुनवाई में गांववार रिपोर्ट पढ़ी जाती है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सरपंच, सचिव अन्य पर आरोप तय किया जाता है।

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बुधवार को तहसीलदार टीआर भाराद्वाज की अध्यक्षता में जनसुनवाई के दौरान कुल 11 गांव में कई प्रकार की गड़बड़ी व अवैध वसूली की शिकायत सामने आई। 8 गांव नकिया, देवपहरी, पसरखेत, तिलाईडांड, चुईया, गोरमा, कुदमुरा व फुलसरी में कुल दो लाख 12 हजार रूपए की मनरेगा में फर्जीवाड़े के तहत वसूली पाई गई।

सर्वे टीम ने पाया था कि रोजगार सहायक, सरपंच, सचिव सहित अन्य ने मिलकर गांव के लोगों का नाम मस्टररोल में चढ़ा दिया गया था। सर्वे में उन ग्रामीणों ने काम नहीं करना बताया है। ऐसे में इन सभी से इतने रूपए की वसूली होगी। इसी तरह तीन गांव बुंदेली, चाकामार, कुरूडीह में इंदिरा आवास व पीएम आवास के नाम पर हितग्राहियों से वसूली की शिकायत सर्वे में आई थी। कुरूडीह में सरपंच द्वारा 5 हितग्राहियों से 2-2 हजार रूपए की वसूली की गई।

ऑडिट सर्वे रिपोर्ट पर किसी भी जनपद में अब तक वसूली शुरू नहीं

पिछले आठ महीने में अलग-अलग जनपद के 75 से अधिक गांव में अब तक 35 लाख रूपए से अधिक की वसूली सामने आ चुकी है। जनसुनवाई में अवार्ड पारित होने के बाद बकायदा इनसे वसूली करने की जवाबदारी एसडीएम, तहसीलदार से लेकर जनपद सीईओ की है। लेकिन अब तक एक भी मामले में कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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मनरेगा बना फर्जी मस्टररोल का गढ़
मनरेगा में फर्जीमस्टररोल इस कदर किया जा रहा है कि एक ही गांव के ग्रामीणों का नाम फर्जी उपस्थिति और फर्जी भुगतान पर चढ़ा दिया जा रहा है। बकायदा अंगुठा भी फर्जी लगाकर भुगतान किया जा रहा है। जनपद के बाबू से लेकर गांव के सरंपच और सचिव सभी की भूमिका इसमें संदिग्ध है। वहीं ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आएं जब पात्र हितग्राहियों को भी भुगतान अब तक नहीं किया गया है।

इन गांव में फर्जी मस्टर रोल से भुगतान
फुलसरी 57902, कुदमुरा 58855, गोरमा 13066, चुईया 3006, तिलाईडांड 30809, पसरखेत 8741, देवपहरी 12040, नकिया 22560