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वन विभाग टीम की कुछ पल के लिए थम गई सांसें जब दंतैल ‘गणेश’ से हुआ सामना

कुछ देर तक गाड़ी को डराने की कोशिश किया फिर शाम ढलते ही ग्राम सरदूकला के जंगल से लगे तालाब में पानी पीने पहुंचा।

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 16, 2018

वन विभाग टीम की कुछ पल के लिए थम गई सांसें जब दंतैल 'गणेश' से हुआ सामना

वन विभाग टीम की थम गई सांसें जब दंतैल 'गणेश' से हुआ सामना

कोरबा. गांव में रथयात्रा के दिन अधिकांश ग्रामीण गांव के बाहर घूम रहे थे। आसपास दंतैल हाथी गणेश की मौजूदगी की वजह से खतरा बढ़ गया था। लिहाजा वन विभाग की टीम ने गांव के सीमावर्ती क्षेत्र में घूम रहे ग्रामीणों को घर भेजा जा रहा था। इसी बीच टीम की गाड़ी जैसे ही गांव के बाहर एक सड़क पर पहुंची, सामने दंतैल हाथी गणेश खड़ा हुआ था। गाड़ी और गणेश के बीच महज चार कदम की दूरी थी। थोड़ी देर सामने खड़़े रहने के बाद चिंघाड़ मारकर डराने की कोशिश की।

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शनिवार की शाम रथयात्रा का मेला लगा था। गांव के अंदर खतरा ज्यादा था। काफी ग्रामीण गांव के बाहर घूम रहे थे। इनमें कुछ नशे में भी थे। वन विभाग की टीम पहले से पहुंच कर सभी ग्रामीणों को सायरन और मुनादी करके सचेत कर चुका था। बाहर घूम रहे कुछ लोगों को भी गांव के अंदर भेजा गया। इसी बीच दंतैल गणेश फिर से उसी जगह से घुस रहा था। जहां उसने एक को मारा था और वहां तीन लोग घूम रहे थे। वहां से वन विभाग की टीम को देखकर गणेश नोनबिर्रा के तरफ चला गया। रात भर आसपास ही घूमता रहा। वन विभाग की टीम सड़क व गांव में सायरन बजाकर लोगों को सूचित करत रही। वन विभाग की टीम भेलवाटार से ग्राम सरदूकला पंहुची, जहां रोड पार करते समय गश्ती में निकले उपवनमंडलाधिकारी मनीष कश्यप और वन विभाग के स्टाफ का हाथी से सामना हो गया। कुछ देर तक गाड़ी को डराने की कोशिश किया फिर शाम ढलते ही ग्राम सरदूकला के जंगल से लगे तालाब में पानी पीने पहुंचा। तब तक वन विभाग की टीम वहां पर पहले से पहुंच चुकी थी।

गणेश को देख ग्रामीण बाइक छोड़कर भागा
एक ग्रामीण तो मेले से आते समय गणेश को रोड में देखकर गाडी छोड़कर भाग गया। फिर सुबह अपनी गाड़ी लेने आया। तब स्टाफ ने उसे उसकी चाबी लौटाई। दंतैल को खाने को मिल रहा है जिससे वह अंदर बस्ती में घुसने की कोशिश करता है और इससे हादसा होने का डर है। लिहाजा ऐसे जगहों पर ऐहतिहात बरती जा रही है।

नाले सूख रहे
एसडीओ ने बताया कि एक युवा हाथी को प्रतिदिन औसतन 200 किलो खाना और 200 लीटर पानी चाहिए। कोरबा वनमंडल में साल भर औसतन 50 हाथी होते हंै जिनको कुल 100 क्विंटल खाना और 10,000 लीटर पानी चाहिए। पहले ये पूर्ति जंगल से हो जाती थी। पर अब जंगल घटने से खाना और पानी दोनों में कमी आई है। जंगल में पट्टे के लिए अतिक्रमण और खेत बनने से साल भर बहने वाले नाले सूखते जा रहे है। इससे हाथियों के सामने समस्या पैदा हो गई है।