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बीस साल पहले शिक्षाकर्मी भर्ती में हुई थी गड़बड़ी, चयन समिति के सीईओ सहित पांच सदस्य को कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा

- वर्ष 1998 में पाली विकासखंड में शिक्षाकर्मी वर्ग- 3 की हुई थी भर्ती

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कोरबा

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Shiv Singh

Mar 22, 2018

बीस साल पहले शिक्षाकर्मी भर्ती में हुई थी गड़बड़ी, चयन समिति के सीईओ सहित पांच सदस्य को कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा

कोरबा . 20 साल पहले शिक्षाकर्मी वर्ग -3 की भर्ती में हुई गड़बड़ी के एक मामले में कोर्ट ने चयन समिति के पांच सदस्यों को चार-चार साल कैद में रखने की सजा दी है। इसमें पूर्व ब्लॉक सीईओ और जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल है। बीईओ के खिलाफ अभियोग पत्र पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई है।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि वर्ष 1998 में पाली विकासखंड में शिक्षाकर्मी वर्ग- 3 की भर्ती हुई थी। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति स्कूलों में होनी थी। उम्मीदवारों को चयन करने के लिए ब्लॉक स्तर पर एक चयन समिति का गठन किया गया था। इसमें पाली ब्लॉक के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी महाबीर प्रसाद को चयन समिति का अध्यक्ष और चयन समिति में तत्कालीन अध्यक्ष सनत कुमार कश्यप, सालिकराम मरकाम, प्रेम सिंह श्याम और राधा वरकड़े को शामिल किया गया था।

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चयन समिति पर पात्र उम्मीदवारों चयनित करने के बजाए अपात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति करने की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के बिलासपुर दफ्तर में की गयी थी। एसीबी ने छानबीन शुरू की तो मामले की गड़बड़ी उजागर हुई। एसीबी ने पाया की अपात्र उम्मीदवारों को चयनित करने के लिए साक्षात्कार में नंबर अधिक प्रदान किया गया। जिन उम्मीदवारों का चयन किया गया, वे चयन समिति में शामिल सदस्यों के रिश्तेदार या करीबी हैं।

पात्र उम्मीदवारों को सूची से बाहर रखा गया था। एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भर्ती में गड़बड़ी करने के आरोप में आईपीसी की धारा 120बी के तहत केस दर्ज किया था। 2005 में कोर्ट में चालान पेश किया था। इसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रही थी। एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार प्रधान की अदालत ने चयन समिति को पात्र उम्मीदवारों के बजाए अपात्र उम्मीदवारों को भर्ती करने का दोषी माना। दोषियों को चार चार वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है।

खंड शिक्षाधिकारी के खिलाफ अलग से आरोप पत्र
चयन समिति में पाली विकासखंड के तत्कालीन बीईओ डीआर परते भी सदस्य थे। उनके भी षडयंत्र में शामिल होने के साक्ष्य कोर्ट को मिले हैं। कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को पत्र जारी किया है। यह पूछा है कि किन कारण से बीईओ परते के खिलाफ अभियोग पत्र पेश नहीं किया गया। ऐसे करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। साथ ही परते के खिलाफ अभियोग पत्र पेश करने के लिए कहा गया है।