
गेवरा ने रचा इतिहास, 50 एमटी कोयला खनन करने वाली देश की पहली खदान
इस उपलब्धि से गेवरा से लेकर बिलासपुर और कोल इंडिया मुख्यालय कोलकाता से लेकर कोयला मंत्रालय तक खुशी की लहर है। कोयला मंत्री ने ट्वीट कर इस उपलब्धि में खुशी जताई है। इसके लिए बधाई दी है। इस अवसर पर एसईसीएल के सीएमडी डा. प्रेम सागर मिश्रा व निदेशक मंडल के सदस्य गेवरा परियोजना पहुंचे। एक कार्यक्रम में शामिल हुए। उत्कृष्ठ कर्मियों को पुरस्कृत किया।
इस अवसर पर मीडिया से चर्चा करते हुए सीएमडी एसईसीएल डा. प्रेम सागर मिश्रा ने कहा कि गेवरा में विकास और विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में इसे 70 मिलियन टन विकसित किया जा रहा है। भविष्य में इसे और भी अधिक विस्तारित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कोयला उत्पादन को बढ़ाने के लिए कंपनी प्रयास कर रही है। इसी के तहत एमओडी मोड पर चिन्हित अंडर ग्राउंड खदानों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसईसीएल के पास बिजली कंपनियों के पर्याप्त कोयला है। जरुरत के अनुसार प्लांटों को कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर एसके पाल (निदेशक तकनीकी ), जी श्रीनिवासन (निदेशक वित्त), एसएन कापरी (निदेशक योजना एवं परिचालन), देबाशीष आचार्या (निदेशक कार्मिक) और गेवरा परियोजना के महाप्रबंधक एसके मोहंती उपस्थित थे।
30 मार्च तक हासिल हो जाएगा लक्ष्य
इस वर्ष गेवरा खदान ने 52 मिलियन टन कोयला खनन का लक्ष्य है। उम्मीद है कि इसे 31 मार्च से पूर्व ही पूरा कर लिया जाएगा। उत्पादन के साथ-साथ गेवरा एरिया 50 मिलियन टन के कोल डिस्पैच के लक्ष्य के भी बेहद करीब (49.08) मिलियन टन पहुंच चुका है। मीडिया से चर्चा करते हुए गेवरा के महाप्रबंधक एसके मोहंती ने बताया कि इस खदान को खोलने की प्रक्रिया सन 1979 में शुरू हुई थी। दो साल बाद 1982 में पहली बार गेवरा से खनन किया गया है। इसकी सालाना उत्पादन क्षमता पांच मिलियन टन थी। समय के साथ गेवरा का विस्तार किया गया है। आज इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 52.5 मिलियन टन पहुंच गई है। अगले वित्तीश् वर्ष में गेवरा से 62.5 मिलियन टन कोयला खनन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चर्चा के दौरान सीएमडी ने बताया कि एसईसीएल में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। कंपनी इसे लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए नई-नई तकनीक के इस्तेमाल किये जा रहे हैं ताकि जरूरत के अनुसार कोयला खनन किया जा सके।
एसईसीएल ने पुराने रिकार्ड को पीछे छोड़ा
एसईसीएल ने 157.43 मिलियन टन कोयला उत्पादित कर अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन को पीछेे छोड़ दिया है। इससे पूर्व वर्ष 2018-19 में एसईसीएल ने 157.35 मिलियन टन कोयला खनन किया था।
गेवरा देश दुनिया के लिए महत्वपूर्ण क्यों
●यहां कोयले का इतना रिजर्व पड़ा है जिससे 10 साल तक पूरे देश के लिए बिजली बनाई जा सकती है।
●किसी भी एक वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने वाली देश की एकमात्र खदान है।
●कोयला उत्पादन करने के लिए आधुनिक व इको-फ्रेन्डली तकनीक सरफेस माइनर कटर मशीन
● ब्लास्टिंग फ्री टेक्नालाजी है। इससे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव नहीं आता।
●ओबीआर के लिए उच्च क्षमता के 42 क्यूबिक मीटर शावेल तथा 240 टन डम्फर का इस्तेमाल किया जाता है जो कि दुनिया भर में इस कार्य में प्रयुक्त होने वाली बेहद उच्च क्षमता की एचईएमएम मशीन है।
● गेवरा खदान में प्रति पाली में लगभग 700 कोलकर्मी कार्य करते हैं।
●52 मिलियन टन कोयले में से एनटीपीसी को डेलिगेटेड माइन के जरिए लगभग 14 मिलियन टन, रेलवे वैगन के जरिए लगभग 22 मिलियन टन वहीं रोड व बाशरी मोड के जरिए 15 मिलियन टन प्रेषित किए जाने की योजना प्रस्तावित है।
●गेवरा खदान में जी-11 ग्रेड का कोयला पाया जाता है।
Published on:
21 Mar 2023 05:21 pm
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