15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#Topic Of The Day – आउट सोर्सिंग से मजदूरों की भर्ती खतरनाक : जायसवाल

- ठेका मजदूरों को शोषण से बचाना बड़ी चुनौती - पत्रिका के टॉपिक ऑफ द डे कार्यक्रम में शामिल हुए श्रमिक नेता

2 min read
Google source verification
#Topic Of The Day - आउट सोर्सिंग से मजदूरों की भर्ती खतरनाक : जायसवाल

कोरबा . बिजली कर्मचारी ने कोरबा पूर्व स्थित पुराने संयंत्र को बंद कर 650 मेगावाट की नई इकाई स्थापित करने की मांग की है। साथ ही आउट सोर्सिंग के कार्यों में ठेका मजदूरों के शोषण पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने सामाजिक सुरक्ष का लाभ दिए जाने की वकालत की है। शनिवार को बिजली कर्मचारी संघ के महामंत्री राधेश्याम जायसवाल पत्रिका के टॉपिक ऑफ डे कार्यक्रम में शामिल हुए।

उन्होंने कर्मचारियों की समस्या पर चर्चा की। बिजली कंपनी में नियमित कर्मचारियों की संख्या में हो रही कमी और आउट सोर्सिंग से मजदूरों की भर्ती को खतरनाक बताया। कहा कि आउट सोर्सिंग के मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। इसमें अफसर और ठेकेदारोंं को गठजोड़ काम कर रहा है।

Read More : #Topic Of The Day- बढ़ रहा घरेलू हिंसा का दायरा, समझदारी से बचेगा परिवार

मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी प्रदान नहीं की जा रही है। बोनस, एरियर्स, पीएफ का हिसाब मांगने पर मजदूरों को काम से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ठेके में पेटी ठेका का खेल चल रहा है। इससे काम की गुणपत्ता पर असर पड़ रहा है। जायसवाल ने कहा कि मजदूरों को शोषण रोकने के लिए मजदूर संघ गंभीर है। इसके लिए प्रबंधन पर दबाव बनाया जा रहा है। बिजली संघ की कोशिश है कि प्रशिक्षित मजदूर को ही काम पर लिया जाए। जायसवाल ने अविभाजित मध्य प्रदेश के जमाने से बिजली कंपनी अनुकंपा नौकरी की बाट जोह रहे लोगों के प्रति सहानुभूति प्रकट की। कहा कि कंपनी को नौकरी देनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया है।

संयंत्रों की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए जायवाल ने कहा कि नेशनल ग्रिन ट्रिब्यूनल के आदेश पर बिजली कंपनी ने चरणबद्ध कोरबा पूर्व स्थित पुराने संयंत्र की इकाइयों को बंद करने का निर्णय लिया है। संघ भी पुरानी इकाइयों को बंद करने के पक्ष में है। इसके स्थान पर ६५० मेगावाट की एक यूनिट लगाने की मांग की जा रही है। ऐसा होता है तो मजदूरों की रोजी रोटी चलती रहेगी। प्रबंधन को भूमि अधिग्रहण की भी जरूरत नहीं होगी। जरूरी संसाधन पहले से मौजूद हैं। सरकार को यूनिट लगाने का फैसला करना है।