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Holi 2020: सावधान! पहाड़ के नीचे बसे इस गांव में होली खेलना है मना

Holi 2020: ग्रामीण होलिका दहन के दूसरे दिन पूजा-अर्चना कर देवी को चढ़ाते हैं पकवान का भोग, पुलिस रिकार्ड में गांव को आदर्श ग्राम का दर्जा, यहां अन्य गांवों की तुलना में अपराध भी कम।

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Holi 2020: सावधान! पहाड़ के नीचे बसे इस गांव में होली खेलना है मना

Holi 2020: सावधान! पहाड़ के नीचे बसे इस गांव में होली खेलना है मना

कोरबा. जिले का खरहरी एक ऐसा गांव है जहां होली खेलना मना है। यह परंपरा कई सौ साल से चली आ रही है। अनिष्ट के भय से लोग होली खेलने से परहेज करते हैं। इसलिए होली पर्व के दिन गांव में सन्नाटा पसरा रहता है। अंचल में होली पर्व की धूम है लेकिन कोरबा शहर से 22 किलोमीटर दूर खरहरी एक ऐसा गांव है,जहां पिछले कई दशकों से रंगों का यह त्योहार नहीं मनाया जाता है।

त्योहार न मनाए जाने के पीछे की वजह गांव के ही बुजुर्ग बताते हैं। गांव के रामकृपाल ने बताया कि कई दशक पहले गांव में होली धूमधाम से मनाई जाती थी, पर एक बार होलिका दहन के दिन पूरे गांव में आग लग गई। कई घर जलकर खाक हो गए। इसे दैवीय प्रकोप से भी जोड़कर देखा जाता है। इनका मानना है कि अगर गांव में होली का रंग पड़ा तो गांव में अनर्थ हो जाएगा। यही कारण है कि तब से आज तक पूरे गांव में होली सन्नाटा पसर जाता है।

कुछ ग्रामीण यह भी बताते है कि होली के दिन गांव का ही एक ग्रामीण होली खेलकर पड़ोसी गांव से अपने गांव खरहरी पहुंचा तो उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई थी। जिससे ये ग्रामीण दहशत में आए और कभी होली न खेलने का प्रण ले लिया।

ग्राम खरहरी के ग्रामीण होली न खेलने के पीछे एक दैवीय कारण को भी बताते है कि गांव के करीब में आदिशक्ति मां मड़वारानी का मंदिर स्थित है एक ग्रामीण के अनुसार देवी ने उसे स्वप्न दिया कि उनके गांव के लोग होली न मनाएं और उसी को दैवीय भविष्यवाणी मानकर पीढ़ी दर पीढ़ी होली का पर्व न मनाने का यहां के ग्रामीणों ने फैसला कर लिया।

ग्रामीणों का कहना है कि होली के दिन पूरे गांव में आग लग गई थी, इससे ग्रामीण बेघर हो गए थे। उनकी सम्पत्ति राख हो गई थी। घटना के दूसरे दिन गांव के लोगों को देवी मां मड़वारानी ने सपने में आगजनी की वजह होली बताई। बैगा ने दूसरे दिन ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

ग्रामीणों ने इसे देवी का संदेश मानकर भविष्य में दोबारा होली नहीं खेलने का संकल्प लिया। ग्रामीण इस संकल्प से आज तक डिगे नहीं हैं। ग्रामीणों का मानना है कि देवी मड़वारानी का होली के दिन पहरा रहता है। यदि इसने किसी को गांव में होली मनाते देख लिया तो अनिष्ट हो जाएगा।

सन्नाटा पसरा
जिले में होली को लेकर उत्साह है। वहीं ग्राम खरहरी में सन्नाटा पसरा हुआ है। नगाड़े की धुन यहां सुनाई नहीं देती, होलिका दहन की भी तैयारी नहीं की गई है। सामान्य दिनों की तरह ग्रामीणों की दिनचर्या है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि होली के दिन इस गांव में दूसरे गांव के लोग भी होली खेलने की हिम्मत नहीं करते और न ही गांव के लोग दूसरे गांव होली खेलने जाते हैं। ग्रामीण होलिका दहन के दूसरे दिन पूजा-अर्चना कर पकवान का भोग देवी को चढ़ाते हैं।

यहां की फिज़ा है निराली...
पुलिस के रिकार्ड में ग्राम खरहरी को आदर्श ग्राम का दर्जा प्राप्त है। यहां अन्य गांवों की तुलना में अपराध कम होते हैं। गांव में होली नहीं खेलने की परंपरा से यहां के लोग सुकुन महसूस करते हैं। होली के दिन हुड़दंग नहीं होने से गांव का वातावरण पूरी तरह शांतिमय रहता है।