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तीन साल में जिले के सिंचित क्षेत्र में सिर्फ 20 हेक्टेयर की वृद्धि

कोरबा. बीते तीन साल में सिंचित क्षेत्र में सिर्फ 20 हेक्टेयर का ही इजाफा हो सका है। सिंचाई के साधन जिले में बेहद कम है। जिले की खेती किसानी पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। अधिकारियों का दावा था कि 2023 मार्च तक योजनाएं पूरी हो जाएगी, लेकिन कार्यों की स्थिति के मुताबिक अभी और समय लग सकता है।

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तीन साल में जिले के सिंचित क्षेत्र में सिर्फ 20 हेक्टेयर की वृद्धि

तीन साल में जिले के सिंचित क्षेत्र में सिर्फ 20 हेक्टेयर की वृद्धि

जिले में सिंचाई विभाग के वृहद परियोजनाएं, मध्यम और छोटी परियोजनाओं के साथ मनरेगा और कृषि विभाग के माध्यम से सिंचित क्षेत्र के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। उसके बाद भी सिंचित क्षेत्र में इजाफा नहीं हो पा रहा है। बीते तीन साल में सिर्फ 20 हेक्टेयर का ही इजाफा हुआ है। 2019-20 और 2020-21 में सिंचित क्षेत्र 24100 हेक्टेयर था। जबकि 2022-23 में यह बढ़कर 24120 हेक्टेयर हो चुका है। तीन साल में वृद्धि की दर से स्पष्ट है कि नहीं के बराबर लोगों को लाभ मिल पा रहा है।


ऐसी कोई योजना जिससे बांगो का पानी मिल सके
इतने साल बाद भी ऐसी कोई बड़ी योजना की प्लानिंग तक नहीं हो सकी जिससे बांगो बांध का पानी जिले के किसानों को मिल सके। बांध से लगे पोड़ी, कटघोरा और कोरबा के खेत पानी के लिए हर साल तरसते हैं। बांध में पर्याप्त पानी है। अधिकारियों का ध्यान जिन योजनाओं पर है उनके पूरे होने से सिर्फ साढ़े आठ हजार हेक्टेयर खेत को ही पानी मिल पाएगा। जबकि 16 हजार हेक्टेयर खेतों के लिए पानी की व्यवस्था अब भी नहीं के बराबर है।


कटघोरा व्यपवर्तन के सीजन से पहले पूरे होने की संभावना कम
जिले में निर्माणाधीन सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना कटघोरा व्यपवर्तन के अब अगले साल ही पूरा होने की उम्मीद है। इसके पूरे होने से 1991 हेक्टेयर खेतों को सीधे पानी मिल सकेगा। हालांकि एक दर्जन गांव की अटकी जमीन अधिग्रहण में अफसरों ने तेजी लाई है। लेकिन इस सीजन से पहले काम पूरा हो पाना मुश्किल है।


पूरे हो चुके 74 में से कई जगह पानी नहीं
जिले में कुल 74 योजनाओं से खेतों को पानी मिलने का दावा अधिकारी करते हैं, लेकिन कई जगह एनीकट के गेट टूटे हैं। दीवार क्षतिग्रस्त है। नहरों की मरम्मत नहीं हो रही है। 74 प्रोजेक्ट से साढ़े 16 हजार हेक्टेयर को पानी मिल रहा है, लेकिन मरम्मत नहीं होने से कई जगह पानी की परेशानी बनी हुई है।


30 परियोजनाएं बीते कई साल से निमार्णाधीन
बीते कई वर्षों से 30 छोटी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। हर बार अधिकारी दावा करते हैं कि अगले मानसून सीजन से पहले काम पूरा हो जाएगा। इस दावे के बीच कई मानसून आए और गए। वर्तमान स्थिति में योजनाओं पर एक साल से दो साल तक की देरी है। इस देरी के बीच आधा दर्जन बड़े प्रोजेक्ट की लागत भी कई बार बढ़ चुकी है। एक तरफ किसानों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ सरकार का बजट भी बढ़ रहा है।

अधिग्रहण में तेजी
जमीन अधिग्रहण तेजी से किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि अगले सीजन तक कई योजनाओं को पूरा कर लिया जाए।
- एस द्विवेदी, कार्यपालन अभियंता, सिंचाई विभाग