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कोरबा पुलिस के पास गंभीर अपराधों की जांच के लिए महिला अधिकारी नहीं

जिले में गिनती के तीन महिला सब इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। एक की पदस्थापना परिवार परामर्श केन्द्र में है।

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कोरबा पुलिस के पास गंभीर अपराधों की जांच के लिए महिला अधिकारी नहीं

कोरबा पुलिस के पास गंभीर अपराधों की जांच के लिए महिला अधिकारी नहीं

कोरबा. आज आठ मार्च है। यह दिवस पूरी दुनिया में महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। समाज में महिलाओं को समान अवसर व बराबर का अधिकार मिले इसके लिए मनाया जाता है। इस दिवस पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ऊर्जाधानी में रहने वाली महिलाओं की स्थिति भी प्रदेश के अन्य शहरों के सामान ही है। दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं यहां होती है। नाबालिग संग भी अपराध होते हैं। लेकिन कोरबा पुलिस के पास गंभीर अपराधों की जांच के लिए महिला अधिकारी नहीं हैं। जिले में एक भी महिला इंस्पेक्टर नहीं है। सब इंस्पेक्टर की संख्या जरूरत के अनुसार से कम है। जिले में गिनती के तीन महिला सब इंस्पेक्टर कार्यरत हैं। एक की पदस्थापना परिवार परामर्श केन्द्र में है। अन्य को अलग अलग स्थाना पर तैनात किया गया है। एक महिला अस्सिटेंट सब इंस्पेक्टर बालकोनगर में तैनात है। इसके कारण कई प्रकार की परेशानी उठानी पड़ती है।

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नियम में प्राथमिक कथन के लिए सब इंस्पेक्टर जरूरी
कानूनी प्रवधान के अनुसार लैंगिक अपराध से बालको का संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले अपराध के मामलों में प्राथमिक कथन महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर को करने होता है। दुष्कर्म और छेडख़ानी की घटनाओं में महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर से प्राथमिक कथन करानी पड़ती है। इसके बाद इंस्पेक्टर चाहे तो पूरी जांच करे या अधीनस्थ को सौंप दे। लेकिन प्राथमिक बयान इंस्पेक्टर को ही दर्ज करना होता है। व्यवस्था नहीं होने के कारण पुलिस को काफी परेशानी उठानी पड़ती है मामला लंबा खिंचता है।

ये हो रही परेशानी
इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर की कमी से महिलाओं के साथ होने वाली गंभीर अपराध की जांच करने में पुलिस को काफी परेशानी हो रही है। पीडि़त महिलाओं को कई थाने में बैठकर महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर के आने का इंतजार करना पड़ता है। इंस्पेक्टर की अनुपस्थिति में जांच में देरी होती है। जांच भी प्रभावित होता है।

-जिले में महिला इंस्पेक्टर की पदस्थापना नहीं है। सब इंस्पेक्टर तीन हैं। महिला अफसरोंं की पदस्थापना पुलिस मुख्यालय करता है। महिलाओं से संबंधित अपराध की जांच पुलिस गंभीरता से करती है- जयप्रकाश बढई, एएसपी, कोरबा

-लैगिंक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किये जाने वाले केस की जांच महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर से कराने का कानूनी प्रावधान है। इसका पालन किया जाना जरूरी है- शिव नारायण सोनी, अधिवक्ता