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पुण्य कोष को बढ़ाने वाला है सिद्ध चक्र महामंडल विधान

चौथे दिवस पर प्रात: प्रतिदिन की भांति आठ बजे श्रीजी का अभिषेक हुआ। श्रीजी की प्रथम शांति धारा मुकेश सिंघई, दर्री एवं द्वितीय शांतिधारा डॉ. प्रदीप जैन ने की। महामंगल आरती करने का अवसर राजू लहरी दर्री को प्राप्त हुआ।

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Piyushkant Chaturvedi

Nov 11, 2016

raising cycle Corporation Legislation

Virtue is a proven fund raising cycle Mahamandal Vidhan

कोरबा.
सिद्ध चक्र महामंडल विधान पुण्य कोष को बढ़ाने वाला, आने वाली विपत्तियों का नाश करने वाला और हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि देने वाला है। उक्त विचार श्री दिगम्बर जैन मंदिर बुधवारी में आयोजित 7 से 15 नवंबर तक चलने वाले सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिवस पर पंडित राजेंद्र ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान अत्यधिक संचित पुण्य से ही संभव हो पाता है। इस विधान को श्रावकजन आसानी से नहीं कर पाते हैं। तीव्र पुण्य से ही ऐसे महिमा वंत, विधान को करने में समर्थ होते हैं।


चौथे दिवस पर प्रात: प्रतिदिन की भांति आठ बजे श्रीजी का अभिषेक हुआ। श्रीजी की प्रथम शांति धारा मुकेश सिंघई, दर्री एवं द्वितीय शांतिधारा डॉ. प्रदीप जैन ने की। महामंगल आरती करने का अवसर राजू लहरी दर्री को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात् आचार्य विद्यासागर महाराज एवं आचार्य विराग सागर महाराज की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन विद्यापूर्ण महिला मंडल दर्री के महिलाओं ने किया। इसके बाद श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की चौथी पूजा प्रारंभ हुई।


जैन मिलन समिति के संरक्षक, अध्यक्ष सुधीर जैन, सचिव चक्रेश जैन, सुबोध जैन, दिनेश जैन, कपूरचंद, शांत कुमार सहित विधापूर्ण महिला मंडल कोरबा, दर्री, बालको, एनटीपीसी, दीपका, गेवरा के सदस्य उपस्थित थे।