
हर रोज अधिकारियों व कर्मचारियों का लगा रहता है आना-जाना, बावजूद 82 लाख रुपए की घास चर गई गाय
कोरबा. स्टेडियम में पिछले साल लगाई गई ८२.८३ लाख रूपए की घास गाय चर गई। ठेेकेदार को घास लगाने के साथ ही साल भर मेंटनेंस भी करना था। २४ घंटे देखरेख के लिए गार्ड रखने थे। जिसे नहीं रखा गया। मुख्य दरवाजे खुले छोड़ दिए गए। नतीजा यह रहा कि साल भर में नए घास का नामोनिशान मिट चुका है। कटीलें घास व पौधे तक उग चुके हैं।
नगर निगम द्वारा पिछले तीन साल से स्टेडियम में कई कार्य कराए गए। इनमें से एक था स्टेडियम के अंदर लगी घास को हटाकर उसकी जगह स्पेशल बरमूड़ा घास लगाना। इसकी कुल लागत थी ८२ लाख ८३ हजार रूपए। राष्ट्रीय स्तर के मैदान पर इस तरह की घास लगाई जानी चाहिए थी। ठेकेदार ने काम तय समय में पूरा कर लिया।
महापौर द्वारा इसका उद्घाटन पिछले साल अगस्त में किया गया। निगम ने ठेकेदार को पूरी राशि का भुगतान तक कर दिया। लेकिन शर्त के मुताबिक ठेकेदार को घास लगाने के साथ इसकी देखरेख भी पूरे एक साल तक करनी थी। स्टेडियम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि घास लगाने के बाद शर्तों के मुताबिक इसकी देखरेख मानकों के अनुरूप नहीं की गई। परिणाम यह हुआ कि लाखों रुपए के काम पर पानी फिर गया और ठेकेदार ने भी दिलचस्पी नहीं ली।
स्टेडियम परिसर में जोन दफ्तर
स्टेडियम परिसर में ही नगर निगम का टीपीनगर जोन कार्यालय है। जहां दिन भर अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता है। उसके बाद भी इस तरह की घोर लापरवाही की गई। ठेकेदार द्वारा देखरेख नहीं करने के बावजूद समय पर न तो स्टेडियम का निरीक्षण किया गया और न ही ध्यान दिया गया।
बरमूड़ा घास की यह है खासियत
आमतौर पर फुटबॉल ग्राउंड में पांच प्रकार के घास का प्रयोग किया जाता है। गर्म जगहों के लिए बरमूडा घास ज्यादा उपयोगी होता है। ठंड प्रदेश में केंटुकी कूलग्रास प्रयोग में लाया जाता है। बरमूडा घास को एथलेटिक्स फील्ड के लिए सबसे बेहतर घास माना जाता है। आमतौर पर गर्म प्रदेश में पाया जाने वाला यह घास आधुनिक फुटबॉल ग्राउंड में उपयोग में लाया जाता है। मैच के 24 घंटे बाद ही यह फिर से खेलने लायक हो जाता है।
करोड़ों की हाइमास्ट नहीं जल रही
निगम द्वारा मैदान के चारों ओर रात्रिकालीन खेल प्रतियोगिता के लिए डेढ़ करोड़ खर्च कर हाइमास्ट लाइट लगाई गई है। लेकिन इसके लगने के बाद से आज तक इसे एक बार भी चार्ज नहीं हो सका। आगामी दिनों कई खेलकूद प्रतियोगिता शहर में होनी है। इस स्थिति के कारण अब वैक ल्पिक व्यवस्था में आयोजन कराना पड़ता है।
-ठेकेदार को सालभर मेंटनेंस करना था। कर्मियों को निर्देश दिया गया था कि मवेशियों को भीतर जाने से रोका जाएं।
ग्यास अहमद, जोन कमिश्नर, टीपी नगर
-इसकी जानकारी नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों को कल ही भेजा जाएगा। जिसकी भी गलती होगी उस पर कार्रवाई होगी।
रणबीर शर्मा, आयुक्त, नगर निगम कोरबा
Published on:
27 Jul 2018, 12:05 PM IST
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