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खुश खबर : अब दवाइयों की कमी से मरीजों को नहीं होना पड़ेगा परेशान, एसईसीएल प्रबंधन ने दिलाया भरोसा

- कोयला मजदूर संघ की एसईसीएल प्रबंधन के साथ हुई चर्चा

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अब दवाइयों की कमी से मरीजों को नहीं होना पड़ेगा परेशान, एसईसीएल प्रबंधन ने दिलाया भरोसा

कोरबा . एसईसीएल की अस्पतालों में दवाओं की कमी दूर करने का प्रबंधन ने वादा किया है। कंपनी के कार्मिक निदेशक आरएस झा के साथ कोयला मजदूर संघ की द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसमें प्रबंधक ने दवाइयों की कमी को दूर करने का भरोसा दिया। कोयला मजदूर संघ की विभिन्न मांगों को लेकर एसईसीएल मुख्यालय में प्रबंधन के साथ चर्चा हुई। श्रमिक संगठनों ने प्रबंधन के अस्पताल में सर्दी जुखाम जैसी छोटी छोटी बीमारियों की दवाइयां नहीं मिलने पर प्रबंधन को अवगत कराया। इससे होने वाली परेशानी की ओर प्रबंधन का ध्यान खींचा।

इस पर कार्मिक निदेशक आरएस झा ने आश्वासन दिया कि हाने वाली एक हफ्ते में दवाइयों की कमी दूर कर ली जाएगी। इसके लिए विभागीय प्रक्रिया चल रही है। प्रबंधन ने सड़क दुर्घटना में घायल कोल कर्मियों का इलाज कंपनी के पैनल अस्पताल में कराने पर सहमति व्यक्त किया। श्रमिक नेता व जेबीसीआई के सदस्य लक्ष्मण चन्द्र ने बताया कि वर्तमान में कोई कोयला श्रमिक सड़क दुर्घटना में घायल होता है तो उसे कंपनी के अस्पतताल में पहले भर्ती करना पड़ता है।

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स्थानीय अस्पताल से पैनल हॉस्पिटल को केस रेफर किए जाते हैं। कई बार हादसे में श्रमिक गंभीर रूप से घायल होता है, उसे तत्काल इलाज की जरूरत होती है। ऐसे मामले में प्रबंधन ने कर्मचारियों को पैनल अस्पताल में इलाज कराने पर सहमति व्यक्त की है। लेकिन इसके लिए घटना के तत्काल के बाद कर्मी या उसके रिश्तेदार को स्थानीय अस्पताल को सूचित करना होगा। बैठक में कार्मिक निदेशक के अलावा एसईसीएल के चीफ मेडिकल सर्विसेस मीनाक्षी देव सहित अन्य अधिकारी, श्रमिक नेता महेन्द्र सिंह, अवराज सिंह, संजय सिंह, टिकेश्वर सिंह और राजेन्द्र विश्वकर्मा आदि शामिल थे।

अस्पतालों में नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
खदान एसईसीएल प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह अस्पताल खोले हैं लेकिन इन अस्पतालों में जरूरत के हिसाब से न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही सभी अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टर। ऐसे में खदानों में होने वाली दुर्घटनाओं, समय-असमय बीमार होने वाले एसईसीएल कर्मी और उनके परिजनों को समुचित उपचार की सुविधाएं नहीं मिल पाती हैंं, जब कर्मचारी संगठन ऐसी मांग उठाते हैं तो उन्हें प्रबंधन आश्वासन देकर चुप करा देता है और यह समस्याएं बनी रहती हैं।