
कोरबा . माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं व बारहवीं की आंसरसीट के मूल्यांकन के लिए शिक्षा विभाग ने अपने स्तर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मूल्यांकन कार्य तीन अप्रैल से प्रस्तावित है। इस बीच संविलियन की मांग को लेकर शिक्षाकर्मियों ने मूल्यांकन का बहिष्कार करने की घोषणा की थी लेकिन अब बहिष्कार को लेकर शिक्षाकर्मियों के संगठन में ही दो फाड़ होने के आसार दिख रहे हैं। वजह यह है कि कुछ शिक्षाकर्मियों के संगठन बहिष्कार करने के पक्ष में नहीं हैं और वे मूल्यांकन करेंगे।
व्याख्याता पंचायत संघ कोरबा के जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार खुंटे ने बताया कि प्रान्ताध्यक्ष कमलेश्वर सिंह राजपूत के निर्देश पर व्याख्याता पंचायत नगरीय निकाय संवर्ग मूल्यांकन कार्य में भाग लेंगे। उन्होंने बताया अत्यावश्यक सेवा कानून के तहत आने वाला कार्य है। यदि किसी सदस्य पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है तो संघ का प्रमुख वाद दायर नहीं करता बल्कि केवल संबंधित कर्मचारी को ही व्यक्तिगत तौर पर कानूनी लड़ाई सरकार से लडऩी होती है।
आन्दोलन में शामिल कर्मचारियों से बिना सलाह मशविरा के पिछले आन्दोलन को छात्रहित में मध्यरात्रि में गोपनीय रूप से शून्य पर वापस लिया गया था, बात अब भी छात्रहित की ही है। इसलिए छत्तीसगढ़ व्याख्याता पंचायत संघ छात्र हित में दसवीं व बारहवीं की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन का कार्य करेगा। यद्यपि व्याख्याता पंचायत संघ सरकार से यह मांग करती है कि सभी शिक्षकों को बिना किसी वर्ष बंधन या शर्त के एक समान रूप से संविलियन करे। समयमान वेतनमान सहित सभी मांगें पूरी करे।
सीएम से भेंट टली मूल्यांकन बहिष्कार जारी
शिक्षाकर्मियों की सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ होने वाली मुलाकात अपरिहार्य कारणों से टल गई। मुलाकात टलने की वजह अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन यह माना जा रहा है कि चूंकि कमेटी की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है इसलिए सरकार कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहती है। शिक्षाकर्मियों ने बयान जारी कर कहा है कि तीन अप्रैल से प्रस्तावित मूल्यांकन का बहिष्कार यथावत रहेगा।
Published on:
3 Apr 2018, 10:37 AM IST
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