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अलविदा कह रही हमारी शहर सरकार ‘बहुत’ कुछ दिया, ‘काफी’ कुछ रह गया

15 साल भाजपा की सत्ता रहने के बाद 2015 में कांग्रेस ने यहां अपना परचम लहराया। बदलाव होने के कारण कई उम्मीदें थी, लेकिन यह बोर्ड उस पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर सका। इस कार्यकाल में दो अच्छी बात रही कि पेयजल की सबसे बड़ी समस्या खत्म हो सकी।

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अलविदा कह रही हमारी शहर सरकार ‘बहुत’ कुछ दिया, ‘काफी’ कुछ रह गया

अलविदा कह रही हमारी शहर सरकार ‘बहुत’ कुछ दिया, ‘काफी’ कुछ रह गया

कोरबा. नगर निगम की चौथी शहर सरकार का कार्यकाल भले चार जनवरी को खत्म हो रहा है। आचार संहिता लगते ही एक तरह से कार्यकाल पूरा मान लिया जाता है क्योंकि इसके बाद निगम की नई परिषद् शहर की कमान संभालेगी। बीते पांच साल में शहर सरकार ने बहुत कुछ दिया, जबकि काफी कुछ अब भी रह गया है। यह पांच साल पेयजल के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रही। जबकि इन पांच वर्षों में सडक़ों ने शहरवासियों को खूब रुलाया है। किसी भी बोर्ड के कामकाज का आंकलन कई बिंदुओं से किया जा सकता है। सफल प्रशासन निर्वाध शहर संचालन, राजस्व वसूली की मजबूती के साथ-साथ विकास, जिसके आधार पर सालों तक शहर याद करता है। 15 साल भाजपा की सत्ता रहने के बाद 2015 में कांग्रेस ने यहां अपना परचम लहराया। बदलाव होने के कारण कई उम्मीदें थी, लेकिन यह बोर्ड उस पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर सका। इस कार्यकाल में दो अच्छी बात रही कि पेयजल की सबसे बड़ी समस्या खत्म हो सकी। इसके अलावा विवाद रहित शासन। सबसे अधिक दिक्कत इन पांच वर्षों में सडक़ों को लेकर हुई।

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वे कमियां जो पांच साल तक चुभती रही
पांच जगहों पर रेलवे फाटक से पूरा शहर परेशान है। इन पांच वर्षों में ना तो कहीं अंडरब्रिज बना,ना कहीं ओवरब्रिज। प्रोजेक्ट सिर्फ प्लानिंग तक ही सीमित रहे। हर दिन फाटक 15 बार बंद होते हैं। हर 40 मिनट में फाटक बंद होते ही जाम लग जाता है। यह सबसे बड़ी समस्या थी, इस पर काम नहीं हो सका। वाय शेप ओवरब्रिज की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

-शहर की सडक़ों पर लोग पांच साल तक खूब धूल झेलना पड़ा है। चाहे वह शहर के बीच की सडक़ हो या फिर उपनगरीय क्षेत्रों की। सडक़ों की दुर्दशा के पीछे भले उपक्रम जिम्मेदार हों, लेकिन सच्चाई ये भी है कि जिम्मेदारी शहर सरकार की थी। ताकि लोगों को सुलभ आवागमन की सुविधा मिल सके।

- शहर के 40 से अधिक जलस्त्रोतों की स्थिति बदहाल स्थिति में है। तालाबों को अतिक्रमणा और गंदगी से निजात नहीं मिल सकी। तालाबों पर हजारों परिवार निस्तारी के लिए निर्भर हैं। उसके बाद भी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से लोगों में नाराजगी भी है।

- आधा दर्जन से अधिक वार्डों में सीवरेज सिस्टम को लेकर सबसे अधिक समस्याएं है। निगम द्वारा विकसित की गई इन कॉलोनियों में क्षतिग्रस्त हो चुके सिस्टम से गंदा पानी बह रहा है।

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हमने इस पांच साल में काम करके दिखाया है। पानी की समस्या से लोगों को मुक्ति दिलाई है। ऐसे भी वार्ड हैं जहां १५ साल से बिजली व सडक़-रोड नहीं बन सके थे। हमने उन जगहों पर काम कराया है। कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। उनके पूरे होने के बाद लोगों को और भी सुविधा मिलेगी।
रेणु अग्रवाल, महापौर कोरबा

शहर पांच किमी की सडक़ के दोनों ओर बसा है, फिर भी इसे संवार नहीं सके। सडक़ पर लगता जाम, धूल और गड्ढों ने लोगों को पांच साल खूब परेशान किया है। कई वादे आज भी पूरे नहीं हो सके हैं। शहर को भारी वाहनों से भी निजात नहीं मिल सकी है।
योगेश जैन, नेता प्रतिपक्ष