
कोरबा . ऊर्जाधानी से बिलासपुर व रायपुर तक चलने वाली पैसेंजर गाडिय़ों डेढ़ माह रद्द करने से रेलवे प्रशासन के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर बुधवार को तिलक भवन में सर्वदलीय बैठक कर इस मुद्दे पर आरपार लड़ाई लडऩे की जरूरत बतायी गयी। बैठक में गुुरुवार को कोरबा रेलवे स्टेशन पहुंचकर ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सुबह 11 बजे गीतांजलि भवन के निकट इकट्ठा होंगे।
उल्लेखनीय है कि रेलवे प्रशासन ने जांजगीर नैला व चांपा स्टेशनों के बीच हसदेव नदी के ब्रिज नंबर ४६ की मरम्मत व रखरखाव के लिए १५ अप्रैल से ३० मई तक कुल ४६ दिनों के लिए कोरबा से बिलासपुर व रायपुर आने-जाने वाली मेमू व पैसेंजर रद्द कर दी हैं। एक साथ ४६ दिनों तक इन यात्री ट्रेनों के रद्द होने से कोरबा शहर व ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोग परेशान हैं, जो इन ट्रेनों से नियमित सुबह- शाम आवागमन करते हैं। इनमें स्कूल कालेज जाने वाले विद्यार्थी, शिक्षक और सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ -साथ बड़ी संख्या में व्यवसायी भी शामिल हैं। रेलवे प्रशासन द्वारा इस प्रकार ट्रेन रद्द होने से शहरवासी नाराज हैं।
रेलवे के खिलाफ एकजुट हुए शहरवासी
बुधवार को विभिन्न दलों व सामाजिक संगठनों की बैठक आयोजित की गई। इसमें कोरबा विकास समिति के तत्वधान में रेलवे एक्शन कमेटी का गठन हुआ और सर्वसम्मति से इस कमेटी के संयोजक मुरलीधर मखीजा को बनाया गया है। इसमें सभी कोरबा वासियों को जोड़ा गया है और जुडऩे की अपील की गई है । रेलवे एक्शन कमेटी का मुख्य मकसद बंद की गई ट्रेनों को पुन: चालू करवाना और इंटरसिटी जैसी कुछ और ट्रेनों को कोरबा तक चलवाना है जिससे अधिक रेल सुविधा मिल सके।
बस व टैक्सी से आना-जाना पड़ रहा महंगा
पैसेंजर व मेमू ट्रेन रद्द होने से कोरबावासियों के पास केवल बस, टैक्सी ही साधन हैं। इन साधनों से न केवल अधिक किराया देना पड़ रहा है बल्कि समय भी अधिक लग रहा है। सबसे अधिक परेशानी छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है, जो रोज आना-जाना करते हैं।
Published on:
19 Apr 2018, 11:09 AM IST
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