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हितग्राहियों को नियमित पेंशन तो दूर पात्रों की सूची तक नहीं दे रहे अफसर

Pension : कलेक्टोरेट कार्यालय में दूरदराज के गांव से लोग पेंशन (Pension) नहीं मिलने की शिकायत लेकर आते रहते हैं। इनमें से कई हितग्राही ऐसे हैं, जिनके नाम 2002 और 2011 की बीपीएल सूची में दर्ज नहीं है।

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हितग्राहियों को नियमित पेंशन तो दूर पात्रों की सूची तक नहीं दे रहे अफसर

हितग्राहियों को नियमित पेंशन तो दूर पात्रों की सूची तक नहीं दे रहे अफसर

कोरबा. हितग्राहियों को समय पर पेंशन (Pension) नहीं मिलने की शिकायतों से प्रशासन परेशान है। पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर इस मुद्दे को लेकर धरना तक दे चुके हैं। व्यवस्था में सुधार नहीं हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर हैं कि नियमित तौर पर पेंशन देना तो दूर अफसर पात्रों के नाम वाली सूची तक समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध नहीं करा सके हैं। इससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कलेक्टोरेट कार्यालय में दूरदराज के गांव से लोग पेंशन (Pension) नहीं मिलने की शिकायत लेकर आते रहते हैं। इनमें से कई हितग्राही ऐसे हैं, जिनके नाम 2002 और 2011 की बीपीएल सूची में दर्ज नहीं है। समाज कल्याण विभाग ने एक माह पहले जिले के सभी जनपदों और निकायों से जानकारी मांगी थी। पत्र जारी कर कहा था कि ऐसे हितग्राही जिनके नाम 2002 और 2011 की बीपीएल सूची में दर्ज नहीं हैं, लेकिन वह पेंशन की पात्रता रखते हैं तो उनकी सूची समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराई जाए। यह सूची समाज कल्याण विभाग को नहीं मिली है।

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एक व्यक्ति के कई खाते इसलिए भी उलझन
ग्रामीण क्षेत्र में कई लोगों के एक से अधिक बैंकों में खाते हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण, सहकारी बैंक, जनधन, पेंशन, मनरेगा सहित हर योजना का लाभ लेने के लिए अलग-अलग खाते खोले गए हैं। पेंशन की राशि उसी खाते में डाली जाती है, जिससे आधार लिंकिंग सबसे आखिरी में हुआ हो। नया खाता खुलते ही राशि पुराने खाते के स्थान पर आधार लिकिंग वाले नए खाते में चली जाती है। जबकि हितग्राही पुराने खाते में पेंशन राशि की बांट जोहते हैं। कई बार बैंक खाता बंद होने के कारण भी पेंशन राशि हितग्राही तक नहीं पहुंच पाती। इस कारण उलझन बढ़ जाती है और हितग्राही शिकायत लेकर मुख्यालय पहुंचते हैं।

इतनी राशि पेंशन की
वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, नि:शक्त, सुखद सहारा जैसे कई श्रेणियों में पेंशन (Pension) राशि सरकार द्वारा दी जाती है। यह राशि क्रमश: 350, 500 और 600 रुपए होती है। यह राशि भी हितग्राहियों को समय पर नहीं मिलती। इसे लेकर पेंशनधारी परेशान रहते हैं। कई बार पात्र हितग्राहियों के आवेदन ग्राम पंचायत से होकर जनपद और समाज कल्याण तक नहीं पहुुंचते हैं।

तीन हजार को नगदी
जिले में तीन हजार हितग्राही ऐसे हैं, जिन्हें पेंशन की राशि का भुगतान नगद किया जाता है। इन्हीं हितग्राहियों को समय पर राशि नहीं मिलने की सर्वाधिक शिकायत रहती है। हालांकि इनके बैंक खाते भी खुलवाए जा रहे हैं।

84 हजार लोगों को मिल रहा पेंशन
राज्य व केन्द्र सहित नगद भुगतान को मिलाकर जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा 84 हजाार 60 हितग्राहियों को हर माह पेंशन (Pension) मिलता है। यह पेंशन जनपदों के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बंाटा जाता है। इन्हीं में से कई हितग्राहियों को नियमित पेंशन नहीं मिलने की शिकायतें बनी रहती हैं।

-समाज कल्याण विभाग का प्रयास रहता है कि पेंशन राशि समय पर मिले। पात्रता वाले हितग्राहियों की सूची जनपदों से मांगी गई थी। अभी नहीं मिली है। एक हितग्राही के कई खाते होने के कारण भी उलझन की स्थिति है- बीएम बेक, उपसंचालक, समाज कल्याण विभाग