
CG Analytical : आरटीई सीटों की संख्या छिपाकर बच्चों की पढ़ाई का हक छीन रहे निजी स्कूल, विभागीय अधिकारी मौन
कोरबा. गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर शहर के बड़े निजी स्कूल पानी फेर रहे हैं। वह नहीं चाहते कि उनके बड़े व आलीशान स्कूलों में किसी गरीब परिवार का बच्चा भी पढ़े। अधिनियम से बचने के लिए ही जिले के कई निजी स्कूलों ने आरटीई कोटे की सीटों को चतुराई से छिपाने का काम किया है। तो दूसरी तरफ अधिनियम के पालन के लिए नियुक्त शिक्षा विभाग के ४९ नोडल अफसरों ने भी यह तस्दीक करने की जहमत नहीं उठाई कि जितने सीटों की जानकारी निजी स्कूलों ने विभाग को आरटीई कोटे से भर्ती के लिए उपलब्ध करायी है, उसकी वास्तविकता क्या है?
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूल की प्राथमिक कक्षा में संबंधित स्कूल के क्षेत्रांतर्गत आने वाले बीपीएल श्रेणी के बच्चों को कुल सीटों की २५ प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है। लेकिन बड़े निजी स्कूलों के लिए यह फायदे का सौदा नहीं है।
इन निजी स्कूलों में प्राथमिक कक्षा में प्रति छात्र औसतन सालाना फीस ४० हजार रूपए है, वहीं आरटीई के तहत प्रवेशित प्रत्येक बच्चे के एवज में उन्हें शासन से सिर्फ सात हजार रूपए फीस प्रतिपूर्ति होती है। ज्यादा पैसों का यही लालच गरीब बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ का प्रमुख कारण है। निजी स्कूलों में बीपीएल वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने की प्रक्रिया जारी है।
पड़ताल में सामने आई बात
निजी स्कूलों द्वारा विभाग को जितनी सीटें आरटीई के कोटे से भर्ती के लिए उपलब्ध करवाई गई है। इन स्कूलों की सीटों संख्या का दस्तावेज पत्रिका ने हासिल करने के बाद पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि कई स्कूलों ने विभाग को गलत जानकारी दी है। सेंट जेवियर्स स्कूल के रिसेप्शन पर बैठी कर्मचारी से पूछा गया कि स्कूल के नर्सरी कक्षा में कुल कितनी सीटें हैं। तो उन्होंने बताया कि तीन सेक्शन हैं। तीनों में ३०-३० बच्चे हैं, नर्सरी में फीस कितनी है इसकी पर्ची भी दी गई जबकि जेवियर्स स्कूल ने शिक्षा विभाग को आरटीई में भर्ती के लिए सिर्फ १० सीटें उपलब्ध करवाई हैं। इस बारे में जब स्कूल के प्रबंधक डीके आनंद से पूछा गया तब उन्होंने कहा कि तीन सेक्शन जरूर हैं। लेकिन वह पूरे प्रायमरी सेक्शन को मिला कर हैं।
डीपीएस एनटीपीसी में भी गड़बड़
डीपीएस एनटीपीसी ने शिक्षा विभाग को विभाग को आरटीई कोटे से भर्ती के लिए सिर्फ १२ सीटें दी हैं जबकि यहां प्रेप- १ में तीन सेक्शन संचालित हैं। तीनों में ३०-३० बच्चे हैं और कुल सीटों की संख्या ९० है। इसके अनुसार नियत: आरटीई के कोटे में यहां २२ सीटें दाखिले के लिए विभाग को उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। आरटीई के तहत आवेदन करने के लिए जब शासन द्वारा पोर्टल खोला गया था। तब भी शुरूआती कुछ दिनों तक डीपीएस एनटीपीसी का नाम ही पोर्टल से गायब था। अभिभावक चाह कर भी प्रवेश के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे। लेकिन जब पोर्टल बंद होने में अंतिम कुछ दिन शेष थे। तब एनटीपीसी का नाम पोर्टल पर प्रदर्शित हुआ। इस विषय में जानकारी लेने के लिए डीपीएस एनटीपीसी के प्राचार्य सतीश शर्मा के मोबाईन नंबर ९४२५२३११६० पर फोन किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।
अधिनियम के मूल स्वरूप को ही बदल दिया
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत किसी निजी स्कूल में कुल उपलब्ध सीटों के २५ प्रतिशत सीटों पर बीपीएल वर्ग से आने वाले बच्चे को प्रवेश देने का प्रावधान है। लेकिन जैन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के मामले में यहां की नोडल अधिकारी शाउमावि दादर की प्राचार्य मंजू तिवारी ने अधिनियम के तहत प्रवेश का आधार कुल सीटों के बजाए दर्ज संख्या को बना दिया है।
तिवारी से जब पूछा गया कि जैन इंटरनेशनल स्कूल द्वारा सिर्फ दो ही सीटें आरटीई के कोटे से भर्ती के लिए विभाग को उपलब्ध करवाई गई हैं। तो क्या यहां नर्सरी कक्षा में कुल उपलब्ध सीटें आठ हैं? तो उनका कहना था कि सीटें तो ज्यादा हैं। लेकिन दर्ज संख्या कम है। इसलिए दर्ज संख्या के आधार पर दो सीटों पर ही प्रवेश की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यदि दर्ज संख्या इस वर्ष बढ जाती है, तो अगले वर्ष ज्यादा सीटों पर दाखिला दिलवा देंगे।
जैन इंटरनेशनल स्कूल में इस वर्ष केवल दो ही सीटें आरटीई के अंतर्गत उपलब्ध हैं जबकि इनकी तुलना में प्रवेश के लिए कुल छ: आवेदन मिले हैं। यदि अधिनियम के मुताबिक सीटों को ही प्रवेश का आधार बनाया गया होता तो बीपीएल वर्ग के सभी आवेदन करने वालों बच्चों को जैन इंटरनेशनल में प्रवेश मिल जाता। नोडल अधिकारी की लापरवाही से इन बच्चों को अब उनका अधिकार इस वर्ष नहीं मिल सकेगा। जिले में आरटीई से प्रवेश के लिए कुल ४८ नोडल बनाए गए हैं। इनकी उदासीनता व मिलीभगत के कारण कई गरीब बच्चों को उनका अधिकार अब नहीं मिल सकेगा।
इतना फीस वसूलते हैं निजी स्कूल
सेंट जेवियर्स स्कूल में नर्सरी कक्षा में ८ हजार ३०० रूपए एडमिशन फीस, हर माह की फीस १३९५ और ८५० रूपए का फॉर्म भी लेना होगा। यह सभी मिलाने पर साल भर का खर्च होता है। २५ हजार ८९० रूपए। इसके अलावा समय-समय पर बदलने वाले गणवेश, किताबें व अन्य गतिविधियों को मिलाकर यह फीस ३५ से ४० हजार रूपए तक पहुंच जाती है। डीपीएस, डीडीएम, जैन इंटरनेशनल, न्यू ऐरा आदि सभी स्कूलों में नर्सरी की सालाना फीस का औसत ४० हजार के करीब है।
आरटीई से प्रवेशित बच्चों की फीस देती है सरकार
शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई के तहत नर्सरी या पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों के एवज में निजी स्कूलों को प्रति छात्र सालाना सात हजार रूपए का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा ६५० रूपए अतिरिक्त गणवेश व जूते के लिए दिए जाते हैं। बड़े निजी स्कूल साल भर में इससे कहीं ज्यादा फीस वसूलते हैं। यही कारण है कि वह सीट छिपाकर आरटीई के कोटे से एडमिशन देने से बचना चाहते हैं।
इन स्कूलों ने इतनी सीटें बतायी विभाग को
डीपीएस, एनटीपीसी १२
डीपीएस, बालको ४०
डीडीएम ०८
जैन इंटर. स्कूल ०२
सेंट ज़ेवियर १०
कैयिरय पब्लिक स्कूल ०७
डीएवी, बालको ०८
न्यू ऐरा २६
निर्मला(रिस्दी) १७
बीकन, सीएसईबी ११
डीएवी गेवरा १८
-निजी स्कूलों द्वारा आरटीई कोटे के तहत गलत सीटों की जानकारी विभाग को देना गंभीर मामला है। यदि किसी भी निजी स्कूल द्वारा सीटों की गलत जानकारी दी है तो उनकी नए सिरे जांच की जाएगी। गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्यवही होगी- डीके कौशिक, डीईओ, कोरबा
Published on:
26 Jun 2018 11:43 am
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