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Breaking : मिनी हाइडल प्लांट का सेफ्टी गेट और वॉल टूटा, संयंत्र में भरा पानी तो जान बचाकर भागे कर्मचारी

840 किलोवाट बिजली का उत्पादन बंद

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कोरबा

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Shiv Singh

May 25, 2018

840 किलोवाट बिजली का उत्पादन बंद

840 किलोवाट बिजली का उत्पादन बंद

कोरबा . कोरबा पश्चिम स्थित हाइडल प्लांट के वाटर टैंक का गेट और वॉॅल टूट गया है। इससे संयंत्र में हजारों क्यूसेक पानी भर गया है। जलभराव से हाइडल प्लांट को बंद कर दिया गया है।

इससे 840 किलोवाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। संयंत्र से पानी को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।

घटना गुरुवार देर शाम सात से आठ बजे के बीच की बताई जा रही है। पानी के अधिक दबाव से हाइडल प्लांट के वाटर टैंक में दरार पड़ गई। वाटर टैंक का गेट और वॉल टूट गया।

पानी संयंत्र के भीतर तेजी से घुसने लगा। यह देखकर प्लांट में काम करने वालों के बीच अफरा तफरी मच गई। नियमित और ठेका मजदूर जान बचाकर प्लांट से बाहर भागे। प्लांट को बंद कर दिया। उनकी नजरों के सामने ही देखते देखते प्लांट में पानी भर गया। पानी का भराव इतना तेज था कि कर्मचारी अपनी गाडिय़ों को भी सुरक्षित बाहर नहीं निकाल सके।


घटना की सूचना बिजली विभाग के अधिकारियों को दी गई। अफसर मौके पर पहुंचे। लेकिन संयंत्र में पानी भर से अंदर नहीं जा सके। सुरक्षा के लिहाज से हाइडल प्लांट के बाहर गार्डों को तैनात किया गया है। किसी व्यक्ति के अंदर जाने पर रोक लगा दी गई है। अभी भी संयंत्र में घुटना के उपर तक पानी भरा हुआ है। इसे निकालने की कोशिश जारी है।


दर्री स्थित मिनी हाइड्रल प्लांट से 840 किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए कोरबा पश्चिम संयंत्र से निकलने वाली पानी का उपयोग किया जाता है। पश्चिम संयंत्र की पानी को एक वॉटर टैंक में एकत्र किया जाता है। इसका उपयोग बिजली निर्माणा में किया जाता है। उसके बाद पानी रिटर्न केनॉल में छोड़ा जाता है।

मरम्मत नहीं होने से हुई घटना
घटना का कारण वॉटर टैंक का मरम्मत नहीं होना बताया जा रहा है। लगभग दो साल पहले बिजली कंपनी ने हाइडल प्लांट के वॉटर टैंक और वॉल की मरम्मत के लिए निविदा जारी की थी। मेसर्स ग्रेस फुल नाम की ठेका कंपनी को काम मिला था। कार्य की लागत अधिक थी।

लेकिन ठेकेदार कम कीमत पर करने के लिए तैयार हो गया था। काम में नुकसान होने लगा तो ठेकेदार भाग गया। काम पूरा नहीं किया। वॉटर टैंक की मरम्मत और वॉल रिपेयरिंग नहीं हुई थी। इस बीच गुरुवार को वॉटर टैंक में पानी का भराव अधिक हो गया। दबाव बढऩे से गेट और वॉल टूट गया। इससे पानी संयंत्र के भीतर घुस गया है।