
जिले के 390 ग्राम पंचायतों में से ज्यादातर गांव के सरपंचों की शिकायत
कोरबा. हर चौथे सरपंच पर गड़बड़ी या फिर फर्जी मस्टररोल की शिकायतें हैं। लगातार दागदार होते हुए सरपंचों को देखते हुए अब सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी बिल या फिर काम की पूर्णता: रिपोर्ट सरपंच से नहीं ली जाएगी। यह एक जुलाई से प्रभावशील कर दिया गया है।
कोरबा जिले के ३९० ग्राम पंचायतों में से ज्यादातर गांव के सरपंचों की शिकायत कलेक्ट्रोरेट जनदर्शन में आती रहती है। गांव-गांव जाकर सर्वे करने के बाद निकासी बैठक में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की टीम भी अब तक ६५ से ज्यादा गांव में फर्जी आहरण सहित कई प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टी की जा चुकी है। दरअसल हर गांव में होने वाले कार्यों में सरपंचों की मिलीभगत होती है। ऐसे कार्य जिनको कराने में सबसे अधिक बचत के साथ गड़बड़ी करने का मौका मिले वे ही कराएं जाते थे। काम पूरा होने पर जब तक सरपंच पूर्णता की रिपोर्ट ना दें तब तक बिल जारी नहीं होता है। लिहाजा इस पूर्णता रिपोर्ट को जारी करने में मोटी रकम कमीशन के तौर पर दिया जाता है। इसकी शिकायत व कार्रवाई कई बार हो चुकी है। लिहाजा इसे देखते हुए अब मनरेगा के किसी भी कार्य को कराने से पूर्व सरपंचों की राय जरूर ली जाएगी। लेकिन पूर्णता रिपोर्ट पर सहमति नहीं ली जाएगी।
पत्रिका व्यू
सरपंचों के हस्ताक्षर जरूरी न होने के आदेश से गांव स्तर पर होने वाले कार्यों पर कमीशनखोरी पर लगाम लगने की उम्मीद है। वास्तव में गांवों में हो रहे कार्यों की गुणवत्ता पर हर समय सवाल उठते रहते हैं। जांच में शिकायतें सही भी पायी गयी हैं इसलिए किसी भी सूरत में इस प्रकार के भ्रष्टाचार पर लगाम कसना जरूरी है। अब देखना होगा कि इस आदेश से कहां तक भ्रष्टाचार रोका जा सकेगा।
86 सरपंच घोटालेबाज, लाखों की होनी है वसूली
जांच में ऐसे दोषी सरपंच और सचिवों से वसूली के लिए प्रस्ताव पारित होने के बाद एसडीएम कार्यालय से नोटिस जारी होकर कई को वसूली के लिए डिमांड भेजा गया। वसूली के इस मामले में कई ने कोर्ट से मोहलत ले ली तो कुछ को जेल की हवा तक खानी पड़ी। लेकिन सरकारी राशि में अनियमितता करने वाले इन पंचायत पदाधिकारियों व पूर्व पदाधिकारियों से वसूली नहीं हो पा रही है। ना तो जनपद ना ही एसडीएम या फिर तहसीलदार के माध्यम से यह प्रक्रिया बढ़ पा रही है। कुल मिला कर लगभग एक करोड़ 28 लाख रूपए वसूली अब तक पेंडिंग में है।
इसी तरह पोड़ीउपरोड़ा में भी महज तीन ही मामले सामने आए हैं जबकि कोरबा, करतला और पाली सबसे अधिक दागदार सरपंच सचिव रहे हैं। कोरबा में 35, करतला में 31 तो पाली में 19 ऐसे मामले पिछले डेढ़ साल के भीतर सामने आ चुके हैं लेकिन अभी गड़बडिय़ां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। 86 में से 15 सरपंचों ने कोर्ट की शरण ले ली। 14 बकायदारों ने हाइकोर्ट से तो एक को जिला न्यायालय से राहत मिल गई है। इनसे लगभग 75 लाख रूपए की वसूली होनी है।
-शासन का नया आदेश जिला पंचायत को मिल गया है। जिसमें अब कार्य की पूर्णता पर किसी भी सरपंच से सहमति नहीं लेनी है। यह प्रभावशील हो चुका है।
-संदीप डिक्सेना, एपीओ, मनरेगा कोरबा
Published on:
09 Jul 2018 11:48 am
बड़ी खबरें
View Allकोरबा
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
