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स्वाइल हेल्थ कार्ड का लक्ष्य छह हजार फंड शून्य, धरातल पर कार्य शुरू नहीं

तीन साल बाद अनुविभागीय कृषि विभाग को किसानों की भूमि का मिट्टी परीक्षण हेल्थ स्वाइल कार्ड जारी करने के लिए लक्ष्य तो मिल गया, लेकिन फंड जारी नहीं किया गया। इस कारण मिट्टी परीक्षण का कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। अफसर फंड का इंतजार कर रहे हैं। इसे लेकर किसान एक बार फिर मायूस हो रहे हैं और लाखों रूपए की मशीनें धूल खा रही है।

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स्वाइल हेल्थ कार्ड का लक्ष्य छह हजार फंड शून्य, धरातल पर कार्य शुरू नहीं

स्वाइल हेल्थ कार्ड का लक्ष्य छह हजार फंड शून्य, धरातल पर कार्य शुरू नहीं

कोरबा. खेती प्रारंभ करने से पहले हर साल किसानों की भूमि का मिट्टी परीक्षण के लिए अनुविभागीय कार्यालय में लैब स्थापित किया गया है, लेकिन पिछले तीन साल से लैब में भूमि की मिट्टी की उर्वरता की जांच के लिए लक्ष्य और फंड दोनों ही जारी नहीं किया गया।

इस साल लक्ष्य तो दिया गया है, लेकिन शासन की ओर से फंड जारी नहीं किया गया है। जबकि लैब व कृषि विभाग के पास मिट्टी सैंपल लेने के लिए थैली से लेकर मशीन के सर्विसिंग और 12 पैरामीटर में जांच करने वाली केमिकल नहीं है।

इधर कई मशीनों में सुधार कार्य किया जाना है। इस कारण कार्य इस साल भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसे लेकर किसान परेशान हैं। हाल ही में मिट्टी परीक्षण के लिए लक्ष्य निर्धारित होने से किसानों को उम्मीद थी कि इस साल उनकी भूमि की मिट्टी की उर्वरता की जांच होगी। शासन की ओर से हेल्थ स्वाइल कार्ड जारी होगा।

लाखों रूपए की मशीन खा रही धूल
मिट्टी परीक्षण लैब में केमिकल नहीं होने और फंड नहीं मिलने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। मशीनें भी बंद पड़ी हुई है। इस वजह से लाखों रूपए के मशीन व लैब की सामाग्रियां धूल खा रही है।

इन क्षेत्रों से लिए जाने हैं सैंपल
विभाग की ओर से सभी विकासखंड से छह हजार नमूने लेने के लिए लक्ष्य के अनुरूप योजना बना ली है। फंड का इंतजार कर रहे हैं। जिले के विकासखंड कोरबा, करतला, कटघोरा, पोड़ी उपरोड़ा, पाली के छह-छह ग्राम पंचायत को चयन कर लगभग ३०-३० नमूने एकत्र किए जाएंगे।

ऐसे होती है प्रक्रिया
जिले के कई किसानों की भूमि की मिट्टी को जांच किए निर्धारित अवधि से अधिक हो गई है। जबकि हर साल स्वाईल हेल्थ कार्ड योजना अंतर्गत फसल उत्पान की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पहले मिट्टी की जांच की जाती है। इसके लिए ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी (आरईओ) किसानों के खेत से मिट्टी का सैंपल लेकर कार्यालय में जमा करते हैं। लैब में 12 पैरामीटर में जांच की जाती है। रिपोर्ट के लिए मुख्यालय भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद किसान मृदा और स्त्रोतों के अनुकूल फसल में उपयोग क्षमता के लिए उर्वरता को संतुलित बनाए रखते हैं। इससे फसल के उत्पादन मे वृद्धि होती है। मिट्टी का सैंपल नहीं लेने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसे लेकर किसान भी काफी परेशान है।