
यदि कार या बाइक के इंजन की आवाज 80 डीबी से हुई ज्यादा तो खैर नहीं
कोरबा. गाडिय़ों से निकलने वाली ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल ने २४ मशीनें खरीदी है। जिसमें से पांच मशीनों की पहली खेप का उपयोग संरक्षण मंडल के अधिकारी संयंत्रों के ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए कर रहे हैं। जबकि १९ मशीनों की दूसरी खेप भी कोरबा पहुंच गई है। इन मशीनों का आवंटन कोरबा पुलिस को किया जाएगा। कोतवाली, दर्री, बालकोनगर, कटघोरा सहित सभी थानों को एक एक मशीन दी जाएगी। इन १९ मशीनों में से चार मशीनों का उपयोग ट्रैफिक विभाग करेगा।
ट्रैफिक पुलिस के समक्ष डेमो
ध्वनि की माप करने वाली सभी मशीनें कसेला कंपनी की है। बुधवार को कंपनी ने कर्मचारियों ने ट्रैफिक पुलिस के समक्ष मशीनों का डेमो भी दिया। पुलिस को यह बताया गया कि मशीने कैसे काम करेगी? कंपनी के कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि मशीन में तीन चार्जेबल बैट्री लगी होगी। जरूरत पडऩे पर ट्रैफिक पुलिस मशीनों से ध्वनि को मापकर प्रिंट भी निकाल सकती है। प्रिंट पेपर को सबूत तौर पर कोर्ट में प्रस्तुत किया जा सकता है।
वर्तमान में नए चलन के अनुसार कंपनी मेड बाइक व उसके साइलेंसर से छेड़-छाड़ की जा रही है। आवाज को रोबदार व कर्कश बनाने का चलन तेज हुआ है। इसके कारण राह चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हैरानी तो इस बात की भी है कि कुछ बाइक के शो रूम में भी इस प्रकार के साइलेंसर असानी से प्रेरित कर ग्राहकों को उपलब्ध करवाए जाते हैं। इसके अलावा साइलेंसर से पटाखे की आवाज निकालने का भी जबरदस्त चलन देखा जा रहा है।
किस पर कितना जुर्माना
बाइक: बाइक के इंजन से 80 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण होने पर मालिक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे अधिक डेसीबल की ध्वनि निकलने पर २०० रुपए जुर्माना देना होगा।
कार: कार के इंजन से ८२ डेसीबल से अधिक ध्वनि निकलने पर मालिक को ४०० रुपए तक जुर्माना देना होगा।
कर्मिशियल कार: पैसेंजर या कमॢशयल कार से ध्वनि प्रदूषण ८५ डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए। अन्या मालिक को ५०० रुपए जुर्माना भरना होगा।
बस, ट्रक और ट्रैलर: बस ट्रक और ट्रेलर से धवनि प्रदूषण मानक से अधिक होने पर एक हजार ५०० रुपए जुर्माना लिया जाएगा। इन गाडिय़ों के इंजन से अधिकतम आवाज ८९ से ९१ डेसीबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उद्योगों के ध्वनि प्रदूषण की होगी जांच
इसके अलावा कारखानों से निकलने वाली ध्वनि प्रदूषण की जांच भी होगी। इसकी जिम्मेदारी प्रर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों को दी गई है।
Published on:
06 Dec 2018 12:07 pm
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