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संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस के स्टॉफ ने गाडिय़ों की चाबी जीवीके प्रबंधन के किया हवाले, जानें कर्मचारियों की क्या है मांगें

- जीवीके का दावा है कि हड़ताल पर जाने वाले स्टॉफ के बदले 60 नए स्टॉफ की भर्ती की गई है।

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 17, 2018

संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस के स्टॉफ ने गाडिय़ों की चाबी जीवीके प्रबंधन के किया हवाले, जानें कर्मचारियों की क्या है मांगें

संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस के स्टॉफ ने गाडिय़ों की चाबी जीवीके प्रबंधन के किया हवाले, जानें कर्मचारियों की क्या है मांगें

कोरबा . निश्चित समय पर वेतन भुगतान सहित अन्य मांगों को लेकर संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस के स्टॉफ सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। जिले में 24 स्थान पर तैनात स्टाफ ने इन गाडिय़ों की चाबी जीवीके प्रबंधन को सौंपा है। एम्बुलेंस के ड्राइवर और ईएमटी स्टॉफ की बेमियादी हड़ताल से जीवीके की सर्विस पर असर पड़ा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी हुई। हड़ताल के शुरूआती तीन घंटे तक जिले में एम्बुलेंस की सर्विस ब्रेक डाउन रही। इस अवधि में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोगों ने सम्पर्क किया। लेकिन एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची। दोपहर तक व्यवस्था सामान्य होने का दावा जीवीके प्रशासन ने किया।

जीवीके का दावा है कि हड़ताल पर जाने वाले स्टॉफ के बदले ६० नए स्टॉफ की भर्ती की गई है। हड़ताल लंबी चली तो अन्य स्टॉफ भी लिए जाएंगे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस हड़ताल कई एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में ही खड़ी रहीं। मरीजों को भी पहले जैसी तत्काल सुविधाएं नहीं मिली और वे अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचे।

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चालकों ने बीएमओ को सौंपी वाहन की चाबी
इधर सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर जाने से पहले एम्बुलेंस के ड्राइवर ने गाड़ी की चाबी ब्लॉक चिकित्साधिकारी को सौंप दिया। जिला अस्पताल से चलने वाली एम्बुलेंस की चाबी जीवीके के कर्मचारियों को दी गई। लेमरू, श्यांग और पसान के ड्राइवरों ने भी चाबी अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिया। संघ के जिला अध्यक्ष सालिक राम ने बताया कि हड़ताली स्टॉफ रायपुर के लिए रवाना हुए हैं। जब तक मांगे पूरी नहीं होती काम पर नहीं लौटेंगे। मांगों के सर्थन में कर्मचारियों ११ व १२ जुलाई को काली पट्टी लगाकर विरोध किया था। १३ जुलाई को घंटाघर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया था। १६ जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

ये हैं प्रमुख मांगें
जिले में एम्बुलेंस का संचालन जीवीके करती है। इसके अधीन कोरबा जिले में १०२ स्टॉफ काम करते हैं। उनका कहना है कि जेवीके की तरफ से प्रतिमाह वेतन का भुगतान समय से नहीं किया जा रहा है। दो माह काम करने पर कंपनी एक माह के वेतन का भुगतान करती है। एक माह का वेतन अपने पास रखती है। यही नहीं वेतन भुगतान की कोई निश्चित तिथि निर्धारित नहीं की गई है। २० से २५ तारीख के बीच वेतन का भुगतान किया जाता है। यही नहीं कंपनी ने जून में कर्मचारियों के आधे वेतन का भुगतान किया है। इससे कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। साथ ही सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतनमान के अनुसार मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।