
स्कूली बच्चों को न गणवेश मिला और न बेटियों को मिल पायी सरस्वती साइकिल
कोरबा. स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है। अब स्कूलों में तिमाही परीक्षाओं की तैयारी शुरू हो रही है। लेकिन अब तक विभाग प्रत्येक स्कूल के बच्चों को ना तो गणवेश बांद सका है और ना ही सरस्वती साइकिल योजना के तहत बेटियों को साइकिल ही मिल सकी है।
जिले में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग की वे छात्राएं जो बीपीएल श्रेणी में आती हैं। उनके स्कूल आने-जाने की राह आसान करने सरकार इस सत्र में साइकिल बांटने की तैयारी कर रही है। तैयारियों की सुस्त गति को देखते हुए संभावना है कि सितंबर तक साइकिल वितरण का काम पूरा कर लिया जाएगा। पिछले वर्ष की तरह इस सत्र में भी में कक्षा 9वीं की छात्राओं को सरस्वती योजना के तहत साइकिल देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस बार छात्राओं की संख्या को देखते हुए साइकिल खरीदी के लिए 2 करोड़ 46 लाख 26 हजार 422 रुपए सरकार खर्च करेगी। 8वीं पास कर 9वीं प्रवेश लेने वाली ऐसी छात्राओं को साइकिल देने की योजना है। बांटने में देरी न हो इसलिए जेम पोर्टल से खरीदी का ठेका दिया जा रहा है। जिनका कंपनियों का पंजीयन जेम पोर्टल में होगा। समय पर वितरण नहीं होने पर फर्म से विभाग उसकी भरपाई (भुगतान रोककर) कर सकता है। प्रति साइकिल की कीमत 3593 तय है। मौजूदा सत्र में ६८54 छात्राओं को साइकिल प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।
दो लाख 47 हजार 98 बच्चों को मिलेगा गणवेश
शिक्षा विभाग द्वारा हर साल दावा किया जाता है कि सत्र की शुरूआत में गणवेश वितरण पूर्ण कर लिया जाएगा। लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। इस वर्ष भी शिक्षा विभाग और सर्व शिक्षा अभियान को मिलाकर कुल दो लाख 47 हजार 98 बच्चों को गणवेश वितरित किया जाना है। जबकि सच्चाई यह है कि संकुलों में अब भी गणवेश नहीं पहुंचे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा बालक और बालिकों को मिलकार 34 हजार 405 जबकि सर्व शिक्षा अभियान द्वारा 97 हजार 994 छात्रों को गणवेश दिया जाएगा। कुल मिलाकर एक लाख 32 हजार 399 छात्रों को प्रति छात्र दो-दो गणवेश के हिसाब से दो लाख 64 हजार 798 गणवेश वितरित किया जाना प्रस्तावित है। जिले के कुल 118 संकुल केन्द्र हैं। जिनके माध्यम से गणवेश का वितरण किया जाना है।
विभाग के कामकाज में बढ़ रही उदासीनता
शिक्षा विभाग के कामकाज में उदासीनता लगातार बढ़ती जा रही है। नए सत्र की शुरुआत से ही अधिकारियों और उनके मातहत क्लर्कों की उदासीनता आरटीई के क्रियान्वयन में दिखायी पड़ी और इसी उदासीनता के कारण पालक और बच्चे आरटीई के तहत प्रवेश के लिए दर-दर भटकते रहे। स्थिति यह हो गयी कि दोबार पोर्टल खोले जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। स्कूली बच्चों की फीस व प्रवेश की मानीटरिंग भी सही नहीं हो रही है।
- गणवेश का वितरण करने की प्रक्रिया जारी है। कोशिश है कि जल्द से जल्द वितरण पूरा किया जाए। साइकिलों की प्रक्रिया भी जारी है। अगस्त माह के अंतिम तक साइकिलों का वितरण भी पूरा कर लिया जाएगा।
डीके कौशिक, डीईओ
Published on:
19 Aug 2018 12:26 am
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