
अफसर कह रहे कि बारिश और ट्रकों के दबाव की वजह से फिर से गड्ढे हो गए
कोरबा. कोरबा-चांपा मार्ग में 42 लाख की लागत से टायरिंग कराई गई थी। गडढें को भरा गया था। लेकिन इसकी गुणवत्ता इतनी घटिया कि दो माह भी नहीं चल सका। जिम्मेदार अफसर कह रहे कि बारिश और ट्रकों के दबाव की वजह से फिर से गड्ढे हो गए हैं। टायरिंग व पैचवर्क परमानेंट नहीं होते।
बीते साल अप्रैल से लेकर दिसंबर तक कोरबा-चांपा मार्ग की स्थिति इतनी घटिया थी कि चलना मुश्किल हो गया था। बड़े-बड़े गड्ढे और उड़ती धूल की वजह से 30 किमी का सफर तय करने में एक से डेढ़ घंटे लग जाते थे। बारिश के बाद विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग गई थी। फिर चुनाव निपटने के बाद विभाग ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में टायरिंग शुरू कराई गई।
जहां-जहां अधिक गड्ढे थे वहां डामरीकरण किया गया था। गड्ढों को पाटा गया था। दो माह ही बीते थे अब सड़क की हालत फिर से चौपट हो गई है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। धूल की वजह से लोग परेशान है। विदित हो कि इस कार्य को पीडब्ल्यूडी ने कराया था। अब जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं कि मरम्मत स्थायी नहीं होता। बीच-बीच में हुई बारिश और भारी वाहनों के दबाव की वजह से सड़क उखड़ गई है।
स्पेशल अनुमति ली गई थी इस मरम्मत के लिए
इस सड़क की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी ने स्पेशल तौर पर मुख्यालय से अनुमति ली थी। दरअसल ये सड़क अब एनएच को हैंडओवर कर दी गई है। एनएच द्वारा सड़क निर्माण आठ माह बाद शुरू कराया जाएगा। तब तक मरम्मत नहीं होने से और परेशानी बढ़ जाती। इसलिए विभाग ने अपनी सड़क ना होते हुए भी मुख्यालय से इसके लिए अनुमति ली थी। लेकिन घटिया मरम्मत तक ही सीमित रहा। अब एनएच से निर्माण के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
-मरम्मत स्थायी नहीं होता। बीच में हुई बारिश व भारी वाहनों के दबाव की वजह से सड़क फिर से उखड़ गई है। हमनें गुणवत्तापूर्वक काम किया था।
-नरेश स्वामी, कार्यपालन अभियंता, पीडब्लूडी
Published on:
11 Mar 2019 12:05 pm
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