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Korba News: बेटा उठ जा.. रातभर जुड़वा बच्चों के शव को सीने से चिपकाए मां रोती रही! 16 साल बाद मिली थी खुशी

Korba News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के आयुष्मान हॉस्पिटल में जन्मे जुड़वा बच्चों की पीलिया से मौत हो गई। मामले में खुलासा हुआ है कि रुपयों के लालच में बच्चों को बंधक बनाए रखा..
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नवजात की मौत से भड़के परिजनों का अस्पताल में हंगामा ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh News: दांपत्य जीवन के 16 साल बाद कोरबा के आयुष्मान हॉस्पिटल में जुड़वा शिशुओं को जन्म देने वाली मां और उसके परिवार की खुशियां चंद घंटों में ही मातम में बदल गईं। जिन नवजात शिशुओं को डॉक्टरों ने 36 घंटे तक स्वस्थ बताया, उनकी पीलिया से मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर शिशु रोग विशेषज्ञ न होने के बावजूद रुपयों के लालच में बच्चों को बंधक बनाए रखने और गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

Korba News: अस्पताल में जमकर हंगामा

इसे लेकर रविवार को अस्पताल में जमकर हंगामा और तीखी नोकझोंक हुई। दादरखुर्द निवासी शशिकांत ओझा ने पत्नी सुकन्या को प्रसव के लिए शारदा विहार स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां 16 जुलाई की रात उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। शुरुआत में डॉक्टरों ने दोनों को स्वस्थ बताकर तीन दिन तक निगरानी में रखा।

दोनों शिशुओं में पीलिया के गंभीर लक्षण

इस दौरान दोनों शिशुओं में पीलिया के गंभीर लक्षण उभरने लगे, लेकिन स्थिति नियंत्रण में होने की बात कहकर उन्हें रेफर नहीं किया गया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें न्यू कोरबा हॉस्पिटल ले गए, जहां इलाज के दौरान रविवार तड़के 3.30 बजे एक शिशु ने दम तोड़ दिया। वहीं, दूसरे शिशु को गंभीर हालत में बिलासपुर के हायर सेंटर रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान देर शाम उसकी भी मौत हो गई। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. ज्योति श्रीवास्तव से तीखी बहस की और कार्रवाई की मांग की।

कोरबा के आयुष्मान हॉस्पिटल, डायरेक्टर, डॉ. ज्योति श्रीवास्तव प्रसूता की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। एक बच्चे का वजन कम था और उसे 'मेटाबॉलिक डिसऑर्डर पीलिया' था, जो बेहद घातक होता है। हमारे स्टाफ या डॉक्टरों द्वारा किसी प्रकार की लापरवाही या परिजनों से अभद्रता नहीं की गई है।

अस्पताल में परिवार ने किया हंगामा

शिशु की मौत से नाराज परिवार ने आयुष्मान हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया। सूचना पर पुलिस भी पहुंची। अस्पताल की डॉक्टर ज्योति श्रीवास्तव से परिवार की तीखी बहस हुई। परिवार ने आरोप लगाया कि जबक अस्पताल में नवजात शिशु के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, तो उन्हें 36 घंटे से अधिक समय तक क्योंं रोककर रखा गया? परिवार का आरोप है कि रुपए के लालच में अस्पताल के प्रबंधन ने दोनों शिशु को रेफर नहीं किया।