18 जुलाई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Women HEMM Operators: कोरबा के कोयला खदानों में अब महिलाओं की एंट्री, अब संभालेंगी भारी मशीनों का स्टीयरिंग

Korba Coal Mines: कोरबा की कोयला खदानों में अब महिलाएं भी डंपर और शॉवेल जैसी भारी मशीनें चलाएंगी। SECL ने पहली बार 19 महिला कर्मचारियों को HEMM ऑपरेटर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण शुरू किया है।
2 min read
Google source verification
Women HEMM Operators

कोरबा की खदानों में बदलेगी तस्वीर (photo source- Patrika)

Women HEMM Operators: कोरबा की कोयला खदानों में अब सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी डंपर, शॉवेल और अन्य भारी मशीनें चलाती नजर आएंगी। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई पहल करते हुए पहली बार महिला कर्मचारियों के लिए हेवी अर्थ मूविंग मशीन (HEMM) ऑपरेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर खनन क्षेत्र में नई जिम्मेदारियां सौंपना है।

women empowerment: 19 महिला कर्मचारियों को मिल रही विशेष ट्रेनिंग

SECL के सीएमडी हरिश दुहन की पहल पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम में कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित 19 महिला कर्मचारियों को शामिल किया गया है। उन्हें 6 जुलाई से 18 जुलाई तक कोरबा स्थित गेवरा परियोजना के ओबी फेस में 12 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन महिलाओं को खदानों में नियमित रूप से भारी मशीनों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यह पहली बार होगा जब SECL की महिला कर्मचारी HEMM ऑपरेटर के रूप में कार्य करेंगी।

डंपर और शॉवेल चलाने की मिल रही तकनीकी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को डंपर, शॉवेल और अन्य हेवी अर्थ मूविंग मशीनों के सुरक्षित संचालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। अनुभवी ऑपरेटर उन्हें मशीनों की तकनीकी कार्यप्रणाली, सुरक्षा मानकों, रखरखाव और खदान में काम करने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दे रहे हैं। SECL का कहना है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल मशीन चलाना सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं को तकनीकी रूप से पूरी तरह सक्षम बनाना है ताकि वे खदानों में सुरक्षित और प्रभावी तरीके से जिम्मेदारी निभा सकें।

विशाल मशीनें देखकर पहले लगा डर

प्रशिक्षण में शामिल धनेश्वरी कंवर, हेमलता कंवर, करिना कंवर, सोनिका कश्यप, कमलेश यादव, पूर्णिमा कंवर, सौम्या सिंह, रोशनी देवी, आशा सोनी, अन्नपूर्णा चंद्रा, फुलकुमारी, रूपा राठिया, मेघा साहू, सुमन कुमारी, गायत्री, धरमवती और अनीता दुबे ने अपने अनुभव साझा किए। महिलाओं ने बताया कि जब वे पहली बार ओबी फेस पहुंचीं तो विशाल मशीनों का आकार, उनकी तेज आवाज और खदान का माहौल देखकर घबरा गई थीं। कई महिलाओं के मन में यह सवाल भी था कि क्या वे पुरुष ऑपरेटरों की तरह इतनी बड़ी मशीनें चला पाएंगी।

डर खत्म हुआ, अब बढ़ा आत्मविश्वास

महिलाओं ने बताया कि अनुभवी प्रशिक्षकों ने मशीनों के संचालन की तकनीकी बातें बेहद आसान तरीके से समझाईं। लगातार अभ्यास और मार्गदर्शन से उनका डर धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ मशीनों का संचालन सीख रही हैं। उनका कहना है कि यह प्रशिक्षण केवल नौकरी की नई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता साबित करने और महिलाओं के लिए नई राह खोलने का अवसर भी है।

women in mining: SECL की पहली पहल, महिलाओं को मिलेगा नया अवसर

गेवरा क्षेत्र की एचआर मैनेजर लकिता ने प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि SECL में यह अपनी तरह की पहली पहल है। इसका उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर ऊर्जा और खनन क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबरी से काम करने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस तरह की पहल से महिलाओं की भागीदारी खनन उद्योग में और बढ़ेगी तथा वे नई तकनीकी भूमिकाओं में अपनी मजबूत पहचान बना सकेंगी।

महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

खनन क्षेत्र को लंबे समय से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन SECL की यह पहल उस सोच को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डंपर और शॉवेल जैसी भारी मशीनों की कमान अब महिलाओं के हाथों में होगी, जो न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी बल्कि खनन उद्योग में लैंगिक समानता की दिशा में भी एक नई शुरुआत साबित होगी।