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सड़क हादसे में 36 लोगों की मौत का गुनाहगार कौन?

बीते 11 महीने में 32 ऐसे सड़क हादसे हुए जिनमें 36 लोगों की जान चली गई। किसने ठोका, आरोपी कौन था, कहां से आ रहा था। गाड़ी कौन सी यह राज ही रह गया। अपनों की मौत के आरोपियों को सजा नहीं दिला पाने का अफसोस आज भी उन परिजनों को है। जिन आरोपियों ने हादसों को अंजाम दिया उनके दाम आज भी पाक साफ हैं।

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सड़क हादसे में 36 लोगों की मौत का गुनाहगार कौन?

सड़क हादसे में 36 लोगों की मौत का गुनाहगार कौन?

हिट एंड रन के इन केस में पुलिस के सामने कई तरह की चुनौती सामने आती है। कई घटनाओं की जानकारी हादसे के कुछ घंटों बाद पुलिस को मिलती है जब तक पुलिस खोजबीन शुरु करती है तब तक आरोपी वाहन चालक जिले से बाहर जा चुका होता है तो कभी घटना का कोई चश्मदीद नहीं होता है। इससे ये पता चल सके कि किसने घटना को अंजाम दिया। बीते 11 महीने में ऐसे 32 हादसे हो चुके हैं जिनमें 36 लोगों की जान जा चुकी है। जिन परिवार ने अपनों को हिट एंड रन में खोया है वे आज भी इस आस में है गुनाहगारों को सजा मिलें। निर्धारित अवधि निकलने के बाद ऐसे हादसों को हिट एंड रन के केस में डाल दिया जाता है। इसका मतलब आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी।

जटिल कागजी प्रक्रिया भी मुआवजे में बाधा

मुआवजा मिलने में जटिल कागजी प्रक्रिया से गुजरना होता है। एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, आश्रित का पासबुक, आधार कार्ड और संबंध प्रमाण पत्र के रूप में पारिवारिक सूची आवेदन के साथ देनी होती है। पारिवारिक सूची मुखिया की अनुशंसा फिर सीओ द्वारा निर्गत किया जाता है। दूसरी ओर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए भी लोगों को थाने का चक्कर काटना पड़ता है।

पुलिस की विवेचना में भी रह जाती है कमी

हिट एंड रन के कई ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें पीड़ित परिवार जांच कराना चाहते हैं। परिवारों का कहना है कि घटना के बाद उस मार्ग से गुजरे वाहनों को सीसीटीवी के फुटेज में समय के आधार पर पूछताछ या फिर जांच की जाए तो आरोपी पकड़ में आ सकते हैं।
परिवारों की उम्मीद का पहिया थमा

सलाखों तक नहीं पहुंचे आरोपी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

हिट एंड रन के इन केस में पुलिस के सामने कई तरह की चुनौती सामने आती है। कई घटनाओं की जानकारी हादसे के कुछ घंटों बाद पुलिस को मिलती है जब तक पुलिस खोजबीन शुरु करती है तब तक आरोपी वाहन चालक जिले से बाहर जा चुका होता है तो कभी घटना का कोई चश्मदीद नहीं होता है। इससे ये पता चल सके कि किसने घटना को अंजाम दिया।

बीते 11 महीने में ऐसे 32 हादसे हो चुके हैं जिनमें 36 लोगों की जान जा चुकी है। जिन परिवार ने अपनों को हिट एंड रन में खोया है वे आज भी इस आस में है गुनाहगारों को सजा मिलें। निर्धारित अवधि निकलने के बाद ऐसे हादसों को हिट एंड रन के केस में डाल दिया जाता है। इसका मतलब आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी।


दो लाख तक का मुआवजा

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने संसोधन मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन करनेे के बाद अब हिट एंड रन मामले में मृतक के परिजनों को दो लाख और घायलों को एक लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। हालांकि ये नेशनल हाइवे सड़क में हुए हादसे पर ही राशि मिलेगी।

एक साल के अंदर कर सकते हैं आवेदनहिट एंड रन के मामले में पीड़ित परिवार एक साल के अंदर मुआवजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। जरूरी है कि एफआईआर में अज्ञात वाहन से दुर्घटना की बात दर्ज हो। 90 दिनों में पुलिस को अगर उस गाड़ी का पता नहीं चलता है तो उक्त केस को हिट एंड रन में डाल दिया जाता है।
इन वाहनों की टक्कर से सबसे अधिक हादसे

वाहन हादसा मृतक

मोटर साइकिल 97 97

ट्रक, ट्रेलर 38 44

अज्ञात 32 36

ट्रेक्टर 10 10

कार 22 26

बस 08 14

छोटे मालवाहक 10 13

मेटाडोर 02 02

रेल लाइन क्रॉस कर रही कार मालगाड़ी से टकराई, उडे़ परखच्चे

गेवरा रोड- कोरबा रेलखंड पर मालगाड़ी ने कार को चपेट में ले लिया। कार क्षतिग्रस्त हो गई। चालक को आंशिक चोटें आई है। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। दुर्घटना बुधवार दोपहर लगभग 12 बजे की बताई जा रही है। कोरबा अग्रसेन चौक के पास रहने वाला सतीश अग्रवाल बुधवार को कार सीजी 12 एक्यू 7771 से कोरबा कुसमुंडा के रास्ते गेवरा जा रहा था। कुचैना मोड़ गंगानगर के पास रेल पटरी को पार करने के दौरान मालगाड़ी ने कार को पीछे से ठोकर मार दिया। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। चालक सतीश को चोटें आई। राहगीरों की मदद से सतीश को कार से बाहर निकाला गया। उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस के अनुसार सतीश को हल्की चोटें आई है। घटना कैसे हुई? यह स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि रेल लाइन को पार करने के दौरान चालक सतीश रेल पटरी को दांये बांये नहीं सका होगा। इस बीच मालगाड़ी आ गई होगी। कार को ठोकर मार दिया। घटना की सूचना पर आसपास के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हो गए थे। बताया कि पेशे से ठेकेदार सतीश गेवरा क्षेत्र में कोई काम कर रहा है। वह गेवरा जाने के लिए घर से निकाला था। इसबीच हादसे का शिकार हो गया। मालगाड़ी भी कोरबा से गेवरा की ओर जा रही थी।